यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था डायलिसिस पर, सरकारी तंत्र फेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल कानपुर में मंगलवार को देखने को मिला जहां बीमार बेटे के इलाज के लिए पिता को मासूम को अपनें कंधों पर लादकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक दौड़ना पड़ा। पिता को ना तो स्ट्रेचर, ना व्हील चेयर की सुविधा मिली और बेटे ने अपने पिता के कंधों पर ही दम तोड़ दिया।

मजबूर पिता बेटे के इलाज के लिए भटकता रहा, कंधे पर ही मासूम ने दम तोड़ा

UP health sector is on dialysis severe crisis of doctors are causing huge problems

2.54 लाख डॉक्टर पर सिर्फ एक अस्पताल

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं के आंकड़े प्रदेश की जर्जर अस्पतालों व डाक्टरों की लापरवाही की पोल खोलती है। यूपी में 2.54 लाख लोगों पर सिर्फ एक सरकारी अस्पताल है। ऐसे में गरीबों को इलाज के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। यूपी में स्वास्थ्य सेवाये देश में बिहार के बाद सबसे जर्जर है।

19561 मरीज प सिर्फ एक डॉक्टर

वहीं प्रति मरीज डॉक्टरों के आंकड़े पर नजर डालें तो वह भी काफी चौकाने वाला है। 19561 मरीजों पर सिर्फ एक सरकारी डॉक्टर हैं जबकि 10 लाख मरीजों पर सिर्फ एक डेंटल सर्जन है। जबकि प्रति 3499 मरीजों पर सरकारी अस्पताल में सिर्फ एक बेड है। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे डॉक्टर मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया करा सकते हैं।

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WHO के नियमों से यूपी बहुत दूर

आपको बता दें कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के नियम के अनुसार प्रति 1000 मरीज पर एक डॉक्टर होना चाहिए। लेकिन यूपी मे 19561 मरीजों पर सिर्फ एक डॉक्टर का होना यहां की समस्या की जटिलता को सामने रखता है।

नर्सिंग स्टॉफ का अकाल

नर्सिंग स्टॉफ का भी कुछ ऐसा ही हाल है, 6291 मरीजों पर सिर्फ नर्सिंग स्टॉफ है। लिहाजा सरकारी तंत्र पर आरोप मढ़कर सरकार अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती है। मरीजों के बेहतर इलाज के लिए नयी भर्तियों पर जिस तरह से ग्रहण लगा है वह भी एक अहम वजह है मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाने की।

38 फीसदी अस्पतालों में लटका ताला

प्रदेश के तमाम ऐसे अस्पताल हैं जहां डॉक्टरों का अभाव है लेकिन इस कदम में सरकार के पास कोई पुख्ता प्लान नहीं है। प्रदेश के 38 फीसदी हेल्थ सेंटर में डॉक्टरों के ना होने की वजह से ताला लग चुका है।

स्वास्थ्य बजट में इजाफ सिर्फ 0.2 फीसदी

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार कितना संजीदा है इस बात का अंदाजा आप पिछले साल के सरकार के बजट से लगा सकते हैं। राज्य सरकार ने पिछले एक साल में स्वास्थ्य बजट को सिर्फ 0.2 फीसदी ही बढ़ाया है।

सरकार का टके सा जवाब

प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री शिव प्रताप सिंह के बयान पर नजर डालें तो आप हैरान हो जायेंगे कि वह कहते हैं कि डॉक्टर गांव में काम करने को तैयार नहीं है इसी वजह से 38 फीसदी अस्पतालों में ताला लटका है। उनका कहना है कि अगर डॉक्टरों पर सख्ती की जाए तो जो काम कर रहे हैं वह भी छोड़कर चले जायेंगे। स्वास्थ्य बजट पर मंत्री जी का कहना है कि लोगों की कमी के चलते पुराने बजट का ही इस्तेमाल नहीं हो सका लिहाजा इसे ज्यादा बढ़ाया नहीं गया।

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