राजनीति को नया मोड़ देगा सरदार पटेल का मुद्दा:त्रिपाठी

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लखनऊ| उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी का मानना है कि यह सरदार वल्लभभाई पटेल का मुद्दा देश की राजनीति को एक नया मोड़ देगा। उनका मानना है कि यह मुद्दा कांग्रेस के लिए घातक साबित होगा, और नरेंद्र मोदी को राष्ट्र के नए सरदार के रूप में देखा जाएगा। त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल को राष्ट्रीय एकता, दृढ़ता व पुरुषार्थ का प्रतीक मानते हुए उनकी मूर्ति स्थापित करने का निर्णय लिया है। चूंकि वह लौह पुरुष थे इसलिए उनकी प्रतिमा भी लोहे की बनेगी, वह भी देश के किसानों द्वारा दान दिए गए लोहे से।

त्रिपाठी ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में कहा कि जब देश के हर गांव की मिट्टी और किसानों से लोहा इकट्ठा करने का अभियान शुरू होगा तो पूरा देश सरदार पटेलमय हो जाएगा। भाजपा नेता ने कहा कि देश की जनता केंद्र सरकार की नीतियों, भ्रष्टाचार और मंहगाई से बिल्कुल त्रस्त हो चुकी है। वह परिवर्तन चाहती है। जनता भाजपा को स्वाभाविक विकल्प मान चुकी है और नौजवानों ने मोदी को आदर्श नेता मान लिया है। त्रिपाठी ने दावा किया कि जनता अब यह समझ गई है कि सरदार पटेल को कांग्रेस ने ही देश का प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया। पटेल यदि देश के प्रधानमंत्री होते तो स्थिति कुछ और होती और भारत आज जिन गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, सब उसी समय निबट गई होतीं।

भाजपा की उत्तर प्रदेश में चुनावी रणनीति के बारे में पूछने पर त्रिपाठी ने कहा कि पार्टी बूथ स्तर पर संगठन मजबूत कर रही है। मतदान के समय ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को अपना वोट देने के लिए बूथों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के बढ़ते प्रभाव से कांग्रेस, सपा और बसपा में हताशा और निराशा छाई हुई है तथा इन पार्टियों के कई घोषित प्रत्याशी चुनाव लड़ने तक से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलती स्थिति को देखते हुए दूसरे दलों के तमाम कद्दावर नेता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने को भी आतुर हैं।

भाजपा नेता ने प्रदेश की सपा सरकार पर मतदाता सूची में छेड़छाड़ का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के ग्राम प्रधानों के दबाव में सरकारी कर्मचारियों ने नियोजित रूप से भारी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए हैं। उन्होंने कहा कि कई विधानसभा क्षेत्रों में तो 35 से 40 हजार तक उन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में मतदान किए थे। त्रिपाठी ने निर्वाचन आयोग से इस बात को संज्ञान में लेने का अनुरोध किया है।

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