उन्नाव रेप केस: भाजपा विधायक सेंगर को लेकर प्रियंका ने पीएम मोदी से की अपील, कहा- अभी भी देर नहीं हुई है...

लखनऊ। उन्नाव रेप पीड़िता के एक्सीडेंट के बाद देशभर में गुस्सा है। रेप के आरोपी भाजपा विधायक कुल​दीप सिंह सेंगर पर लग रहे आरोपों के बाद यूपी की योगी सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। सेंगर को लेकर विपक्ष लगातार योगी सरकार पर हमलावर है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ-साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी इस मामले में लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं। मंगलवार को प्रियंका ने एक ट्वीट करते हुए सेंगर को पार्टी से बाहर निकालने की बात कहते हुए लिखा, मिस्टर प्रधानमंत्री, अभी भी देर नहीं हुई है, भगवान के लिए इस अपराधी और उसके भाई को अपनी पार्टी का संरक्षण देना बंद करें।

एफआईआर में नाम होने के बाद बावजूद क्यों नहीं निकाला

एफआईआर में नाम होने के बाद बावजूद क्यों नहीं निकाला

प्रियंका ने लिखा, ''हम कुलदीप सेंगर जैसे लोगों को राजनीतिक शक्ति और संरक्षण क्यों देते हैं, और पीड़ितों को अकेले जिंदगी की जंग लड़ने के लिए छोड़ देते हैं? एफआईआर में स्पष्ट है कि परिवार को डराया और धमकाया गया था। साथ ही इसमें योजनाबद्ध तरीके से दुर्घटना की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।'' प्रियंका ने कुलदीप सेंगर के पार्टी में बने रहने को लेकर लिखा कि "बीजेपी किसका इंतजार कर रही है? एफआईआर में उनका नाम होने के बावजूद इस शख्स को पार्टी से क्यों नहीं निकाला गया?

उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सीडेंट

उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सीडेंट

बता दें, रायबरेली में रविवार दोपहर उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सीडेंट हो गया। ट्रक की टक्कर में रेप पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील की हालत नाजुक बनी हुई है। दोनों को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। परिजनों ने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक्सीडेंट करवाने का आरोप लगाया। इस मामले में सेंगर सहित 10 पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

'बयान बदलने का दवाब डाला'

'बयान बदलने का दवाब डाला'

पीड़िता के चाचा ने आगे बताया कि बाद में कुलदीप सिंह सेंहर ने उन लोगों को जेल से फोन किया। उसने फोन कर कहा कि अगर हम जीना चाहते हैं तो बयान बदल दो। वो रायबरेली की जेल में एक अन्य केस में बंद है और आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, उन्हीं से मिलने के लिए परिवार जब जेल जा रहा था, तब ये दुर्घटना हुई। परिवार वालों का आरोप है कि उन पर लगातार केस को वापस लेने के लिए दवाब बनाया जा रहा था। बार-बार शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आखिरकार पुलिस द्वारा दर्ज पहली एफआईआर में दावा किया गया कि पीड़िता के गांव में तैनात पुलिसकर्मी के सामने ही बीजेपी विधायक का फोन आया। कुलदीप के परिवार वालों से कहा गया कि उन्होंने मामला नहीं सुलझाया तो उन्हें मार दिया जाएगा।

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