लखनऊ में फिर लगे सीएए हिंसा के आरोपियों के पोस्टर, फरार के बारे में सूचना देने पर 5 हजार का इनाम
लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में उत्तर प्रदेश में पिछले साल लखनऊ समेत अन्य शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। मामले में आरोपी बनाए गए लोगों के पोस्टर पहले भी योगी सरकार चौक, चौराहों जैसी सार्वजनिक जगहों पर लगवा चुकी है। एक बार फिर गुरुवार को सरकार ने लखनऊ में चौक और ठाकुरगंज में सार्वजनिक जगहों पर आरोपियों के फोटो और नाम पते लिखे पोस्टर लगवाए हैं। पुलिस ने इस बार दो तरह के पोस्टर जारी किए हैं। एक में उन आरोपियों को रखा है जिन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं दूसरे पोस्टर में उन आरोपियों को रखा गया है जो फरार चल रहे हैं। इनके बारे में जानकारी देने वालों को पांच हजार रुपए इनाम देने की घोषणा की गई है।

जारी किए गए एक पोस्टर में मोहम्मद आलम, मोहम्मद तहिर, रिजवान, नायब उर्फ रफत अली, समेत आठ आरोपी हैं जिनके खिलाफ ठाकुरगंज थाने में केस दर्ज है। इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा चल रहा है। पुलिस ने जो दूसरा पोस्टर जारी किया है उसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना क़ल्बे सादिक के बेटे कल्बे सिब्तैन नूरी, शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास, इस्लाम, जमाल, आसिफ, तौकीर उर्फ तौहीद, मानू, शकील, नीलू, हलीम, काशिफ और सलीम चौधरी के नाम शामिल हैं। दूसरे पोस्टर में जिनके नाम हैं उनको भगोड़ा घोषित कर उन पर इनाम रखा गया है।
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पुलिस अधिकारी का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी करने का प्रयास जारी है। ठाकुरगंज और चौक पुलिस ने फरार आरोपियों के बारे में सूचना देने वालों को पांच हजार रुपए इनाम देने की घोषणा पहले ही कर चुकी है। इन आरोपियों की संपत्ति की कुर्की-जब्ती की कार्रवाई पुलिस कर रही है। 19 दिसंबर 2019 को लखनऊ के ठाकुरगंज, हजरतगंज, चौक समेत अन्य कई इलाकों में आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुई थी। इसमें शामिल लोगों से सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करने की कार्रवाई योगी सरकार कर रही है। पहले भी योगी सरकार ने प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगवाए थे। हाईकोर्ट ने पोस्टर हटाने के आदेश दिए थे लेकिन योगी सरकार फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई जहां मामला चल रहा है।












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