अब्बू, फूफीजान चूस रहीं अखिलेश की दी हुई लॉलीपॉप
लखनऊ (सुयश मिश्रा)। लैपटॉप की जिस लॉलीपॉप को देकर अखिलेश सरकार ने युवा जनरेशन को अपने साथ जोड़ने की कवायद शुरू की वो लॉलीपॉप असल में छात्र नहीं बल्कि उनके बड़े भाई, पापा, मम्मी, बुआ, फूफा, मौसी, चाचा, आदि चूस रहे हैं। यकीन नहीं आता तो छात्रों से खुद पूछ लीजिये। खैर आपको छात्रों के पास जाने की जरूरत नहीं है, हम आपको लिये चलते हैं।
मुफ्त में लैपटॉप मिलने पर छात्रों की भी खुशी का ठिकाना नहीं है। जो अभी इससे वंचित हैं उन्हे आस है कि जल्द ही उनकी मुराद भी पूरी हो जायेगी। चुनावी घोषणाओं के दौरान सपा सरकार ने छात्रों को लैपटॉप व टैबलेट देने की घोषणा करते हुए कहा था कि लैपटॉप व टैबलेट पाने वाले छात्र दुनिया बदलेंगे। वे भी इन्टरनेट के माध्यम से देश दुनिया से जुड़ेंगे जिससे उनका चहुमुखी विकास होगा और युवाओं में एक क्रांति आयेगी। पर सिथतियां कुछ और ही कह रही हैं।

ज्यादातर छात्रों को मिले लैपटॉप को उनके अब्बू ने या फिर घर के अन्य बड़े सदस्यों ने अधिगृहीत कर रखा है। और बकायदा वे उससे अपना व्यवसाय चला रहे हैं। उनकी माने तो लैपटॉप पाने वाले बच्चों को उसे खोलने व बंद करने तक का इल्म नही है। इसलिए यह उनके किसी काम का नहीं। जिन्हें है भी तो बस वे गाना व फिल्में लगाकर उसमें मशगूल रहते हैं। बहुतों को तो बस अच्छे दाम मिलने की देरी है बस। इन परिसिथतियों में सरकार की इस योजना पर कर्इ छात्रों ने विफलता की मोहर लगा दी है तो कर्इ लैपटॉप पाने वालों के लिए अलग से कम्प्यूटर शिक्षा की वकालत कर रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार छात्रों की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कोर्इ ठोस कदम भी उठायेगी या सिथतियां ज्यों कि त्यों बनी रहेंगी।
मजेदार बात यह है कि नक्खास के साकिब हसन बताते हैं कि जिस दिन लैपटॉप मिला, उसी दिन उनके अब्बू ने अपने बिजनेस के लिये उसका इस्तेमाल शुरू कर दिया। वो अपने बिजनेस का लेखा-जोखा अब उस लैपटॉप पर रखते हैं। साकिब ने बताया उसे और उसके अब्बू दोनों को कंप्यूटर आता है, लेकिन अब्बू ने अपना पुराना कंप्यूटर घर लाकर रख दिया और मेरा लैपटॉप ले गये। ऐसा ही हाल कुछ अर्शाना जमील का है, जिसका लैपटॉप आते ही उस पर फूफीजान का कब्जा हो गया। अब बेचारी अर्शाना तभी लैपटॉप के दर्शन कर पाती है, जब उसकी फूफी को काम नहीं होता है।

इंटर पास करने के बाद लखनऊ के सुनील कुमार यादव ने कहा कि लैपटॉप पाकर बहुत खुशी हुर्इ थी पर अभी तक मुझे इसे चलाना नही आया। जिस कारण मेरे भार्इ ने यह कहकर मुझसे लैपटॉप ले लिया कि जब मैं चलाना जान जाऊंगा तो वह मुझे वापस दे देंगे। वहीं बीए कर रहे अंकुर मिश्रा ने कहा, "मेरी बहन को लैपटॉप मिला है पर उसका उपयोग मैं करता हूं, क्योकि उसे अभी चलाना नहीं आता।"
छात्र जुबेर खान ने कहा कि खुश हूं कि प्रदेश सरकार ने लैपटॉप दिया पर अगर वह इसे चलाने का कोर्इ नुस्खा देती तो और बात थी। अजीत कुमार गौतम कहते हैं कि लैपटॉप तो मिल गया है पर उसे चार्ज करने के लिए बिजली की समस्या है। एक बार चार्ज करने के बाद केवल 2 से तीन घंटे तक चलता है जबकि लाइट पूरा दिन नहीं आती है। उपेन्द्र मुझे इसमें ज्यादा जानकारी तो नही है पर गाने व फिल्में चलाना गाने डाउनलोड करना इतना कुछ कर लेता हूं जो कि मेरे लिए बहुत है।












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