यूपी में चाचा-भतीजे के विवाद बीच अब अखिलेश के जुदा तेवर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के भीतर की कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। 12 अक्टूबर को राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर एक बार फिर से यादव परिवार के भीतर विवाद खुलकर सामने आया है।

नेता जी की अनदेखी

नेता जी की अनदेखी

लोहिया की 49वीं पुण्यतिथि के मौके पर जब अखिलेश यादव लखनऊ के लोहिया पार्क में उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे तो ना सिर्फ उन्होंने चाचा शिवपाल सिंह यादव की अनदेखी की बल्कि पिता मुलायम सिंह के वहां पहुंचने से पहले ही वह वहां से चले गए।

समर्थकों के साथ पहुंचे अखिलेश

समर्थकों के साथ पहुंचे अखिलेश

जब अखिलेश यादव लोहिया पार्क से बाहर गए तो उनके साथ तमाम युवा नेता और समर्थक मौजूद थे। अखिलेश यादव के कार्यक्रम स्थल से जाने के बाद चाचा शिवपाल मुलायम सिंह यादव के साथ वहां पहुंचे।

खाली पड़ी रही कुर्सियां

खाली पड़ी रही कुर्सियां

इस दौरान यह देखने वाली बात यह थी कि कार्यक्रम स्थल पर पड़ी तमाम कुर्सियां खाली पड़ी थी। हालांकि कार्यक्रम स्थल पर मुलायम सिंह यादव तकरीबन एक घंटे देर से पहुंचे थे।

पहले भी हो चुका है आमना-सामना

पहले भी हो चुका है आमना-सामना

इससे पहले भी चाचा-भतीजे के बीच की दूरी लोगों के सामने खुलकर आई थी, जब अखिलेश यादव ने शिवपाल को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। लेकिन मुलायम सिंह यादव के हस्तक्षेप के बाद शिवपाल को फिर से उनके मंत्रालय लौटाए गए।

अखिलेश को झुकना पड़ा

अखिलेश को झुकना पड़ा

शिवपाल सिंह यादव को ना सिर्फ उनके मंत्रालय वापस किए गए बल्कि उन्हें प्रदेश का प्रभारी भी बना दिया गया और अखिलेश यादव की सपा प्रदेश अध्यक्ष के पद से छुट्टी कर दी गई थी।

अमर सिंह पर भी अनसुने हुए अखिलेश

अमर सिंह पर भी अनसुने हुए अखिलेश

अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए अमर सिंह को बाहरी बताते हुए कहा था कि यही बाहरी लोग पार्टी के भीतर तनाव की वजह हैं, और यह फैसलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। लेकिन अखिलेश यादव के इस बयान को दरकिनार करते हुए अमर सिंह का पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया।

मुलायम के समर्थन से मजूबत हुए चाचा

मुलायम के समर्थन से मजूबत हुए चाचा

यूपी में तमाम सपा नेता पार्टी के भीतर बढ़ रहे विवाद पर बोल रहे हैं। उनका कहना है कि अखिलेश यादव को कई मौकों पर दरकिनार किया गया और मुलायम सिंह का समर्थन मिलने की वजह से शिवपाल सिंह यादव का प्रभाव बढ़ा है।

कौमी एकता दल पर भी दरकिनार अखिलेश

कौमी एकता दल पर भी दरकिनार अखिलेश

यह शिवपाल सिंह का ही प्रभाव था कि अखिलेश यादव के विरोध के बाद भी कौमी एकता दल का सपा में विलय किया गया और मुख्तार अंसारी को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट दिए जाने की बात हो रही है।

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