मुजफ्फरनगर दंगा: 77 अपराधिक मामले यूपी सरकार ने लिए वापस, नहीं बताया कोई कारण
मुजफ्फरनगर दंगा: 77 अपराधिक मामले यूपी सरकार ने लिए वापस, नहीं बताया कोई कारण
लखनऊ, 25 अगस्त: 2013 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में दंगे हुए थे। इन दंगों को भड़काने के आरोप में मुकदमें भी दर्ज हुए थे। ऐसे ही 77 अपराधिक मामले उत्तर प्रदेश सरकार ने वापस ले लिए हैं। बता दें कि जो मामले वापस लिए गए है वो आजीवन कारावास की सजा से संबंधित थे। खास बात यह है कि इन मुकदमों को वापस लेने का कारण भी यूपी सरकार की ओर से नहीं बताया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों का जल्द निपटारा किए जाने का आग्रह करने से संबंधित मामले में अदालत मित्र के रूप में नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने यह जानकारी दी। विजय हंसारिया ने अधिवक्ता स्नेहा कालिता की ओर से दायर अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित कुल 510 मामलों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है।
यह मामले मेरठ जोन के पांच जिलों में 6869 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा, इन 510 मामलों में से 175 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है, 165 मामलों में अंतिम रिपोर्ट जमा की गई है और 170 मामलों को खारिज कर दिया गया है। इसके बाद राज्य सरकार ने सीआरपीसी की धारा 321 के तहत 77 मामलों को वापस ले लिया। इस संबंध में जारी किए गए सरकारी आदेश में मामले वापस लेने का कोई कारण नहीं बताया गया है। केवल यह बताया गया है कि विशेष मामले को वापस लेने का निर्णय प्रशासन ने पूरी तरह से विचार करने के बाद लिया है।
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ व सूर्यकांत की पीठ बुधवार को अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगी। जिसमें सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग की गई है।












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