गैंगरेप मामले में MP-MLA कोर्ट ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को दिया दोषी करार, इस दिन सुनाई जाएगी सजा
गैंगरेप मामले में MP-MLA कोर्ट ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को दिया दोषी करार, इस दिन सुनाई जाएगी सजा
लखनऊ, 10 नवंबर: कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने चित्रकूट की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने अशोक तिवारी, आशीष शुक्ला को भी इस मामले में दोषी माना है। तो वहीं, इस मामले में कोर्ट 12 नवंबर को सभी दोषियों को सजा सुनाएगा। जबकि चंद्रपाल, विकास वर्मा, रूपेश्वर और अमरेन्द्र सिंह पिंटू को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया गया है।
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बता दें कि यह मामला आज से चार साल पहले यानी 2017 का है। चित्रकूट जिले की रहने वाली एक महिला ने तत्कालीन सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति तथा उनके कई साथियों पर गैंगरेप और बेटी से ऐसी ही हरकत की कोशिश का आरोप लगाया था। जब महिला ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो गायत्री प्रजापति और उसके साथियों ने महिला और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता ने केस दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 18 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गायत्री प्रजापति समेत छह आरोपियों पर गौतमपल्ली थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
वहीं 15 मार्च 2017 को इस मामले में प्रजापति को गिरफ्तार किया गया था। वो तभी से जेल में बंद थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 09 नवंबर को इस मामले में कुछ आरोपियों की ओर से लिखित बहस दाखिल की जानी थी। इसी बीच आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति की ओर अर्जी देकर मुकदमे की तारीख बढ़ाए जाने की मांग की गई। इसमें कहा गया कि मुकदमे को किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। इसके अतिरिक्त इस न्यायालय के उस आदेश को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में चुनौती दी गई है, जिसमें बचाव साक्ष्य पेश करने की अर्जी को खारिज कर दिया गया था।
पीड़िता को दिया था लालच
वहीं 8 नवंबर को अभियोजन की ओर से प्रार्थना पत्र देकर कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि गवाह अंशु गौड़ ने अपने बयान में साफ कहा है कि पीड़िता को कई प्लाटों की रजिस्ट्री और भारी रकम का लालच देकर कोर्ट में सही गवाही न देने के लिए राजी किया गया था। अभियोजन ने रजिस्ट्री को साबित करने के लिए रजिस्ट्रार लखनऊ और पीड़िता की ओर से दिल्ली के कोर्ट को दिए गए कलम बंद बयान को तलब करने का आदेश देने की भी मांग की गई थी।












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