राम मंदिर निर्माण को लेकर जारी सरकारी चिट्ठी पर राजनीतिक हड़कंप

हैदर ने कहा कि पत्र में एक-दो शब्द में गलती हो सकती है, लेकिन यहां तो पूरा का पूरा वाक्य ही गलत है और विषय का संदर्भ और अर्थ दोनों ही भिन्न हैं। शासन द्वारा इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अगर इसे प्रशासन की गलती मानती भी है तो इसका मतलब है कि शासन आंख बंद करके काम कर रहा है। इस गलती से प्रदेश में हालात भी बिगड़ सकते थे, उसके लिए कौन जिम्मेदार होता? प्रदेश सरकार द्वारा सिर्फ गलती स्वीकार कर लेना ही काफी नहीं है।
वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा. चंद्रमोहन शर्मा ने कहा कि शासकीय पत्र सपा की उलझी हुई मानसिकता दर्शाता है। बाद में प्रमुख सचिव गृह द्वारा माफी मांगने पर शर्मा ने कहा कि सरकार और उसके अधिकारी क्या नशा करके सरकार चला रहे हैं? उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर इतना चलताऊ नजरिया प्रदेश में सांप्रदायिक संकट पैदा कर सकता है। शर्मा ने कहा कि इस प्रकरण से यह साबित होता है कि संवेदनशील और गंभीर मुद्दों पर इस तरह की गलतियां सरकार की अक्षमता, दिशाहीनता और अराजकता दर्शाती है। प्रदेश का प्रशासनिक अमला मनमर्जी और गैर जिम्मेदारी से प्रदेश की सरकार चला रहा है।
उल्लखनीय है कि गृह कमल सक्सेना की तरफ से विगत नौ अक्टूबर को पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनकि अधिकारियों को पत्र भेजकर अयोध्या में राममंदिर के निर्माण पर चर्चा करने के लिए बैठक में शामिल होने को कहा गया था। इस बैठक में पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था), पुलिस महानिरीक्षक (रेलवे), पुलिस महानिरीक्षक (अभिसूचना) तथा फैजाबाद के पुलिस महानिरीक्षक, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को बुलाया गया था। बैठक 14 अक्टूबर को प्रमुख सचिव (गृह) आऱ एम़ श्रीवास्तव की अध्यक्षता में लाल बहादुर शास्त्री भवन में होनी थी। मामले के तूल पकड़ने के बाद श्रीवास्तव ने शनिवार देर शाम संवाददाताओं से पत्र के विषय को 'क्लरिकल मिस्टेक' बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और कहा कि बैठक कानून व्यवस्था की समीक्षा को लेकर बुलाई गई थी।












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