NEET और JEE की परीक्षाओं को स्थगित करने के लिए सपाइयों ने राजभवन घेरा, पुलिस ने लाठीचार्ज कर खदेड़ा
लखनऊ। कोरोना वायरस संक्रमण के बीच नीट (NEET) और जेईई (JEE) की परीक्षा कराए जाने के विरोध में राजनीति तेज हो गई। गुरुवार को सपा छात्रसभा और समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता कोरोना वायरस और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जिया उड़ाते हुए राजभनन का घेराव करने पहुंचे। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो झड़प होने लगी। तो पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज कर उन्हें राजभवन के सामने से खदेड़ दिया। इस दौरान पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी ले लिया। बता दें कि इस दौरान कई प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता घायल भी हो गए।
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पुलिस ने किया प्रदर्शकारियों पर लाठीचार्ज
दरअसल, सितंबर में होने वाली नीट और जेईई की परीक्षाओं में करीब 28 लाख छात्र हिस्सा लेने वाले हैं। कोरोना महामारी के कारण तमाम पार्टियां परीक्षाओं को टालने की मांग कर रही हैं। हालांकि परीक्षा को आयोजित करने वाली एजेंसी एनटीए ने कहा है कि दोनों एग्जाम तय समय पर ही होंगे। इसके लिए एनटीए ने एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया है। वहीं, गुरुवार को सपा छात्रसभा और समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने परीक्षाओं को टालने के लिए लखनऊ में राजभवन के सामने प्रदर्शन किया। इनकी मांग थी कि कोरोना वायरस की स्थिति को देखते हुए परीक्षा को टाला जाए। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं पर यूपी पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया।

अखिलेश यादव ने लिखा खुला पत्र
उधर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी परीक्षाओं को टालने के लिए खुपा पत्र लिखा है। पत्र में अखिलेश ने कहा कि अगर दंभी भाजपा को लगता है कि परीक्षार्थियों और अभिभावकों को लोकप्रिय मांग पर वो ऐसे जानलेवा एग्जाम करवा रही है, तो केंद्रों के बाहर वो अपने कैबिनेट मंत्री, सांसद और विधायक तैनात करे। जहां पर कोई भी नियम-कानून व एसओपी नहीं होगा। साथ ही विद्यार्थियों के आने-जाने, खाने-पीने व ठहरने का प्रबंध वैसे ही करें, जैसा वो विधायकों की खरीद-फरोख्त के समय करते हैं। इतना ही नहीं, अखिलेश यादव ने सवाल किया है कि अगर किसी छात्र को संक्रमण हो गया तो उसकी क़ीमत क्या सरकार चुकाएगी? पत्र में अखिलेश ने नारा दिया है कि 'जान के बदले एक्ज़ाम, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा।'

क्या सरकार चुकाएगी कीमत?
अखिलेश ने आगे लिखा है कि भाजपा की तरफ से ये हास्यास्पद और तर्कहीन बात फैलाई जा रही है कि जब लोग दूसरे कामों के लिए घर से निकल रहे हैं तो परीक्षा क्यों नहीं दे सकते। भाजपाई सत्ता के मद में ये भी भूल गए कि लोग मजबूरी में निकल रहे हैं और जो लोग घर पर रहकर बचाव करना भी चाहते हैं आपकी सरकार परीक्षा के नाम पर उन्हें भी बाहर निकलने पर बाध्य कर रही है। ऐसे में अगर किसी परीक्षार्थी, उनके संग आए अभिभावक या घर लौटने के बाद उनके संपर्क में आए घर के बुजुर्गों को संक्रमण हो गया तो इसकी कीमत क्या ये सरकार चुकाएगी?

'भाजपा जानती है वोट नहीं मिलेगा'
अखिलेश ने पूछा है कि कोरोना व बाढ़ में जबकि बस-ट्रेन बाधित हैं तो बच्चे दूर-दूर से कैसे आएंगे? न तो हर एक की सामर्थ्य टैक्सी करने की है और न ही हर शहर में इतनी टैक्सियां हैं। सपा अध्यक्ष ने लिखा है कि ऐसा लगता है कि भाजपा ये समझ चुकी है कि बेरोजगारी से जूझ रहा युवा और कोरोना, बाढ़ व अर्थव्यवस्था की बदमइंतजामी से त्रस्त गरीब, निम्न व मध्य वर्ग अब कभी उसको वोट नहीं देगा। इसीलिए वो युवाओं और अभिभावकों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई कर रही है। भाजपा को सिर्फ वोट देने वालों से मतलब है। नकारात्मक व हठधर्मी बदले की राजनीति करने वाली भाजपा व उसके सहयोगी दलों के खिलाफ देश में एक नई युवा क्रांति जन्म ले रही है। हम सब साथ हैं, आइए मिलकर कहें- जान के बदले एग्जाम, नहीं चलेगा-नहीं चलेगा।












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