जाट नेता हरेंद्र मलिक और उनके बेटे ने थामा सपा का हाथ, अखिलेश यादव ने दिलाई सदस्यता

जाट नेता हरेंद्र मलिक और उनके बेटे ने थामा सपा का हाथ, अखिलेश यादव ने दिलाई सदस्यता

लखनऊ, 30 अक्टूबर: पूर्व राज्यसभा सांसद व चार बार के विधायक हरेंद्र मलिक अपने बेटे और पूर्व विधायक पंकज मलिक के साथ शुक्रवार (29 अक्टूबर) को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। हरेंद्र मलिक और पंकज मलिक को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सदस्यता दिलाई। बता दें कि हरेंद्र मलिक ने 20 साल बाद समाजवादी पार्टी का दामन एक बार फिर से थाम लिया है। वो इस वक्त कांग्रेस पार्टी में थे, जिस उन्होंने छोड़ दिया है।

jat leader harendra Malik and son Pankaj Malik joined Samajwadi Party

पूर्व सीएम अखिलेश यादव के नेतृत्व के प्रति आस्था जताते हुए शुक्रवार को कांग्रेस और बसपा के प्रमुख नेताओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और सर्व समाज एकता दल के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह कश्यप ने अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। इस मौके पर अखिलेश यादव ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी को मजबूती देने वालों का पूरा सम्मान होगा। बता दें, गोवर्धन मथुरा के पूर्व प्रमुख विनोद चौधरी तथा लखनऊ के कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हैदर कांग्रेस छोड़कर आज समाजवादी पार्टी के सदस्य बन गए।

बसपा छोड़कर मुजफ्फरनगर के पूर्व प्रत्याशी लोकसभा जिल्ले हैदर तथा जनपद बलरामपुर के पूर्व विधायक राम सागर अकेला ने भी समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। आज जलवंशीय मोर्चा में सम्मिलित पाटियों-राष्ट्रीय जलवंशीय क्रांति दल के अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र निषाद, राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र साहनी, सर्वजन समता पार्टी के अध्यक्ष आदेष कश्यप, अभय समाज पार्टी के अध्यक्ष पुरूषोत्तम निषाद, अखंड जलवंशीय सेना के अध्यक्ष अजय कश्यप तथा एकलव्य सेना के उम्मेद सिंह कश्यप, कश्यप तुरैहा समिति के रामेश्वर दयाल, केवट आर्मी के बबलू बिन्द, जलवंशीय समिति के जितेन्द्र निषाद, निषाद मल्लाह समिति के शंकर निषाद, निषाद सेना के मुकेश निषाद तथा आजमगढ़ सेवा संस्थान के संजय निषाद ने भी समाजवादी पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की।

जानें हरेंद्र मलिक का राजनैतिक जीवन
हरेंद्र मलिक ने अपना राजनैतिक जीवन चौधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल से शुरू किया था। वह 1885 में खतौली विधानसभा सीट से लोकदल के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद वह लगातार तीन बार 1989, 1991 व 1993 में लोकदल टिकट से बघरा विधानसभा सीट से विधायक रहे। 1996 का चुनाव हारने के बाद उन्होंने लोकदल छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली थी। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा टिकट पर वह 1998 और 1999 में लोकसभा का चुनाव मुजफ्फरनगर सीट से लड़ चुके हैं, लेकिन एक बार वह भाजपा के सोहनबीर सिंह से और एक बार कांग्रेस के सईदुज्जमां से हार गए थे।

2004 में थामा था कांग्रेस का दामन
इसके बाद वेस्ट की राजनीति में सक्रिय होने का प्रयास कर रहे हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने हरेंद्र मलिक को इंडियन नेशनल लोकदल में शामिल कर अपनी पार्टी का यूपी का अध्यक्ष बनाया। 2002 में उन्हें हरियाणा विधानसभा से राज्यसभा में भेज दिया गया। हालांकि उन्होंने 2004 में इनेलो को छोड़कर कांग्रेस का दाम थाम लिया था। तब से वह कांग्रेस में ही थे। तो वहीं, शामली जिला बनने के बाद हरेंद्र मलिक ने अपने बेटे पंकज मलिक को शामली विधानसभा सीट से 2012 में कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा और विजयी रहे। वह 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के समय कांग्रेस के ही विधायक थे। 2017 में पंकज मलिक शामली से चुनाव हार गए थे। पंकज मलिक को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की वेस्ट यूपी में कोर टीम का सदस्य माना जाता था। अब उन्होंने पहली बार समाजवादी पार्टी का दामन थामा है।

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