#UP विधानसभा चुनाव : साख पर 'सवाल' बीजेपी में 'बवाल'

हिमांशु कुमार आत्मीय। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे ही भारतीय जनता पार्टी जनता की नजरों में अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही है। दरअसल इसकी वजह है पार्टी की अंदरूनी कलह। प्रदेश स्तर हो या फिर देश के लिहाज से जनता इस बात की उधेड़बुन में जुटी है कि आखिर वे बीजेपी को क्यों वोट दें।

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जबकि भाजपा खुद में ही एकजुट नहीं नजर आ रही है। पंजाब में बीजेपी को शुक्रवार को उस समय करारा झटका लगा जब अमृतसर से बीजेपी विधायक और पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। नवजोत पंजाब की प्रकाश सिंह बादल सरकार में संसदीय सचिव का पद संभाल चुकी हैं।

जनता जानना चाहती है इन सवालों के जवाब
माना जा रहा था कि नवजोत जल्दी ही आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकती हैं। वहीं इस्तीफे के बाद आप का दामन थामने की हवा ने सियासी खेमे में और भी जोर पकड़ना शुरू कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी के लिए जनता के दिलों में सवालों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार हो चुकी है। सवाल इस बात पर भी अटक जाता है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की बढ़ती सरगर्मियों के बीच भी भाजपा ने अब तक प्रदेश अध्यक्ष तक नियुक्त नहीं किया है। तो सवाल इस बात का भी है क्या वास्तव में संगठन मंत्री का पदभार अरविंद मेनन को सौंपा जाएगा। क्या ये कदम सुनील बंसल और लक्ष्मीकांत वाजपेयी के बीच तनातनी की वजह से उठाया जा रहा है।

कुलमिलाकर सवाल ही सवाल। लेकिन जवाब देना भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुनासिब नहीं समझा जा रहा। हां इन तमाम सवालों के साथ बीजेपी के अंदर मची उठापटक को साफ तौर पर भांपा जा सकता है।

सूबे में ही बंटी हुई है 'बीजेपी'
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के नगरपालिका परिसर में 31 मार्च को भाजपा इंडियन पासी समाज की ओर से राजा गंगा बख्श रावत के द्वारा अंग्रेज सेनापति एल्डर टोन को मारे जाने पर विजय दिवस सम्मान समारोह मनाया गया। कार्यक्रम में पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं मौजूदा भाजपा नेता बृजलाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 रमापति राम त्रिपाठी, किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता रामबाबू द्विवेदी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम का आयोजन पूर्व एमएलसी रामनरेश रावत द्वारा किया गया। हालांकि कार्यक्रम में बाराबंकी से भाजपा सांसद प्रियंका रावत ही नदारत दिखीं, वहीं जिलाध्यक्ष अवधेश श्रीवास्तव कार्यक्रम के शुरू होने से पहले कुछ देर के लिए ही कार्यक्रम स्थल पर आये।

जिस वजह से आम जनता के बीच इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम में ही जिले एवं क्षेत्र के सभी नेता शिरकत नहीं कर रहे। कहीं न कहीं इन बातों से साफ तौर पर यह समझा जा सकता है कि बीजेपी की अंर्तकलह जगजाहिर हो रही है।

मोदी-शाह की साख 'दांव' पर
आपको बताते चलें कि शाह यूपी के प्रभारी रहे हैं, दिल्ली और बिहार के बाद यूपी के चुनाव पर मोदी-शाह की साख दांव पर होगी। जहां एक ओर बसपा सुप्रीमों मायावती विधानसभा चुनाव के मद्देनजर खुद एवं पार्टी को बेहद मजबूत दर्शा रही हैं वहीं भारतीय जनता पार्टी के भीतर से आ रही अंर्तकलह की सुगबुगाहट यूपी के चुनावी किले को भेदने में बीजेपी की खातिर काफी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।

देखना दिलचस्प होगा कि अब इस समस्या से पार पाने के लिए मोदी कौन सा नया फॉर्मूला ईजाद करते हैं। या शाह किस तरह की रणनीति बनाते हैं कि करिश्मा-ए- मोदी लोगों के जहन में फिर से जाग सके।

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