अगर दुनिया ने विवेकानंद के संदेश को स्वीकार कर लिया होता तो 9/11 हमले को टाला जा सकता था- राष्ट्रपति कोविंद
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि यदि विवेकानंद के 11 सितंबर, 1893 को दिए गए संदेश को दुनिया ने स्वीकार कर लिया होता, तो अमेरिका में हुए 9/11 के आतंकी हमले को टाला जा सकता था।
लखनऊ, 11 सितंबर। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को स्वामी विवेकानंद द्वारा 1983 के शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए शांति, न्याय और सहयोग के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि यदि विवेकानंद के 11 सितंबर, 1893 को दिए गए संदेश को दुनिया ने स्वीकार कर लिया होता, तो अमेरिका में हुए 9/11 के आतंकी हमले को टाला जा सकता था।

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बनने वाली राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी) की आधारशिला रखने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने ये बात कही। राष्ट्रपति ने कहा कि आज ही के दिन 128 साल पहले स्वामी विवेकानंद ने शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में भारतीय दर्शन और धर्म से दुनिया को रूपरू कराया। उन्होंने दिखाया कि भारतीय संस्कृति न्याय, सहानुभूति और सहयोग पर आधारित है। अगर दुनिया ने स्वामी विवेकानंद द्वारा 1893 में दिए गए उस भाषण को अपनाया होता तो दुनिया को 9/11 2001 जैसे आतंकी हमला नहीं देखना पड़ता, जोकि मानवता पर हमला था।
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सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सामाजिक योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और बौद्धिक परंपरा के लिए कानूनी दिग्गजों को जन्म दिया है।
राष्ट्रपति कोविंद ने कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की कम संख्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नए विश्वविद्यालय से महिला छात्रों के साथ-साथ पेशे में शिक्षकों की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, महिलाएं कानून और न्याय के प्रति अधिक उन्मुख हैं। वे सभी को न्याय देना चाहते हैं, यह उनके स्वभाव, सोच और संस्कार में है... समाज तब और न्यायपूर्ण बनेगा जब न्यायपालिका सहित सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अधिक होगी। उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में सभी न्यायाधीशों की संख्या को देखते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान में उच्च न्यायपालिका में 12 प्रतिशत से भी कम महिला न्यायाधीश हैं, जो एक ऐसी स्थिति है जिसे सुधारने की आवश्यकता है।
इस कार्यक्रम में कोविंद के अलावा सीजेआई एनवी रमना, कानून मंत्री किरेन रिजिजू, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों ने भाग लिया। इस मौके पर कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि केंद्र सरकार देश में मध्यस्थता कानून के लिए एक नया विधेयक लाएगी। उन्होंने कहा कि हम भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केंद्र बनाना चाहते हैं, जिसके लिए सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में मध्यस्थता पर एक विधेयक पेश करेगी।












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