जनता के पैसों से पार्टी के चुनाव चिन्ह का प्रचार अब पड़ेगा महंगा
नई दिल्ली। जनता के पैसों से राजनीतिक पार्टी का प्रचार प्रसार करना अब सियासी दलों के लिए भारी पड़ेगा। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि सरकार और जनता के पैसों का इस्तेमाल राजनीतिक पार्टी व उसके चुनाव चिन्ह के प्रचार में नहीं किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में बसपा शासन के दौरान जिस तरह से हाथियों की मूर्ती लगाई गई हैं उसको लेकर कोर्ट में अभी भी मामला चल रहा है।

ऐसे में चुनाव आयोग ने जनता के पैसों के उपयोग पर सख्त पाबंदी लगा दी है। यूपी चुनाव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए मायावती सबसे बड़ी चुनौती है। मायावती ने लखनऊ में ना सिर्फ अपनी पार्टी का चुनाव चुन्ह हाथी की बड़ी-बड़ी मूर्तिया लगवाई हैं बल्कि खुद अपनी भी मूर्ति उन्होंने काफी बड़ी साइज में लगवाई है।
इस साल तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के दौरान भी विपक्षी पार्टियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सत्तारूढ़ पार्टी एआईएडीएमके अपने चुनाव चिन्ह दो पत्ती की सरकारी बससों पर इस्तेमाल कर रही थी। ऐसे में चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि अगर भविष्य में ऐसी हरकत की गई तो चुनाव लड़ने पर पाबंदी भी लगाई जा सकती है।
यह फैसला उस वक्त आया है जब हाई कोर्ट ने जुलाई में सुनवाई के दौरान आयोग को एक पैनल बनाने का निर्देश दिया था। यह पैनल मायावती की मूर्तियों के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान बनाया गया था। जिसके बाद पैनल ने निर्देश जारी किया है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी और सरकार जनता के पैसों का इस्तेमाल अपनी पार्टी के प्रचार के लिए नहीं कर सकती है।












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