दल-बदल के बीच टिकटों की बगावत को रोकने के लिए भाजपा का मेगा प्लान

लखनऊ। यूपी चुनाव के मद्देनजर एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी ने तमाम दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल करने का अभियान छेड़ रखा है तो दूसरी तरफ पार्टी में बगावत को रोकने के लिए भाजपा टिकटों के बंटवारे की खास रणनीति बनाने में जुटी है।

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BJP's plan to stop the rebel in the party for ticket distribution

कार्यकर्ताओं के रोष को रोकने के लिए बन रही योजना

भाजपा में कांग्रेस, बसपा और सपा छोड़कर तमाम नेता शामिल हो रहे हैं। कई ऐसे नेता हैं जिनके बारे में कयास लगाये जा रहे हैं कि वह भाजपा का जल्द ही दामन थाम सकते हैं। ऐसे में भाजपा में बाहर से आ रहे नेताओं को लेकर पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के रोष को रोकने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विशेष योजना बना रहा है। ऐसे में अगर पार्टी की यह रणनीति सफल होती है तो पार्टी के भीतर बगावत को खत्म करने में पार्टी सफल हो सकती है।

दूसरे दलों से आये 40 से अधिक नेताओं को मिलेगा टिकट

भाजपा इस बार पिछले बार के चुनाव की तुलना में कहीं अधिक सीट जीतने पर नजर बना रही है। ऐसे में पार्टी ने दूसरे दलों से आये 40 से अधिक नेताओं को टिकट देने की तैयारी कर रही है। ऐसे में टिकटों के बंटवारे के समय उन नेताओं को वरीयता दी जाएगी जिनका जनाधार बड़ा है।

जनाधार और जातीय समीकरण अहम

पार्टी टिकटों के बंटवारे में जनाधार के साथ जातीय समीकरण को भी साधने में जुटी है। इन तमाम रणनीतियों पर सोनभद्र में हुई कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में केशव प्रसाद मौर्या ने अपनी राय रखी और साफ किया कि पार्टी हर हाल में अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान करेगी और उम्मीद करती है कि कार्यकर्ता पार्टी के फैसले के साथ खड़े होंगे।

पुराने विधायकों का टिकट पक्का

पार्टी की रणनीति का एक अहम हिस्सा यह है भी है कि जिन उम्मीदवारों ने 2012 के चुनावों में जीत दर्ज की थी उन्हें इस बार के चुनाव में भी फायदा मिल सकता है और पार्टी इन लोगों को फिर से टिकट दे सकती है। पार्टी इन लोगों को इस आधार पर टिकट दे सकती है क्योंकि इन लोगों ने सपा लहर के दौर में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की थी।

दूसरी पार्टियों के नेता भाजपा के लिए यूपी में बड़ी चुनौती

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दूसरे दलों के नेताओं के लिए खास रणनीति

भाजपा में दूसरे दलों से आ रहे नेताओं की वजह से पार्टी के भीतर बगावत को रोकने के लिए उन पार्टी उन सीटों पर बाहरी दलों के नेताओं को टिकट देगी जहां से पार्टी कभी जीत हासिल नहीं कर पायी है। इन सीटों पर पार्टी जातिगत समीकरण को साधते हुए टिकटों का बंटवारा किया जाएगा।

पार्टी इस रणनीति से कार्यकर्ताओं की नाराजगी को खत्म करने की कोशिश करेगी। ऐसी सीटों पर दूसरे दलों के नेताओं को टिकट देने के फैसले का यहां के कार्यकर्ता पार्टी का विरोध इसलिए नहीं करे पायेंगे क्योंकि यहां से पूर्व उम्मीदवारों ने जीत हासिल नहीं की थी।

सिर्फ 30 फीसदी बाहरी नेताओं को मिलेगा टिकट

केशव प्रसाद मौर्या ने पहले ही साफ कर दिया है कि दूसरे दल से आ रहे नेताओं मे से सिर्फ 30 फीसदी नेताओं को ही आगामी चुनाव के लिए पार्टी का टिकट दिया जाएगा। ऐसे में पार्टी अपने इस फैसले से भी कार्यकर्ताओं व नेताओं में बगावत को रोकने में सफल हो सकती है।

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