यूपी चुनाव से पहले मायावती पर गिर सकती है स्मारक घोटाले की जांच

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के बाद माना जा रहा है यूपी सरकार मायावती और उनकी पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ बड़ी कार्यवाही कर सकती है।

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Big names of BSP likely to feel the heat ahead of UP assembly poll

चुनाव से पहले गिर सकती है गाज

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान सपा इस वादे के साथ सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ आयी थी कि वह स्मारक घोटाले के आरोपियों को जेल भेजेगी। ऐसे में अब जब सपा सरकार के महज कुछ महीने बचे हैं माना जा रहा है कि इस घोटाले पर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है।

कई मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित तमाम शीर्ष भाजपा नेताओं ने सपा और बसपा के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया था। जिसके बाद दोनों पार्टियों के बीच भ्रष्टाचार को लेकर डील होने का आरोप लगाया गया।

पुरानी फाइलों को फिर से टटोला जा रहा है

भाजपा भी सपा सरकार को स्मारक घोटाले पर शुरु से घेरती आ रही है, ऐसे में 2017 विधानसभा चुनाव के करीब आने के बाद स्मारक घोटाले की पुरानी फाइलों को एक बार फिर से बाहर निकाला जा रहा है।

2014 में दर्ज की गयी थी एफआईआर

आपको बता दें कि बसपा सरकार के दौरान नोएडा और लखनऊ में स्मारकों के निर्माण में 14 अरब रुपए के घोटाले का मामला सामने आया था, जिसमें बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा सहित 19 अधिकारियों पर लखनऊ के गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज करायी गयी थी।

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200 लोगों के बयान दर्ज

सतर्कता अधिष्ठान के महानिदेशक भानु प्रताप सिंह का कहना है कि इस मामले की जांच चल रही है, निष्पक्षता से चल रही इस जांच में दो सौ से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर लिये गये हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस जांच पर नजर बनाये हैं और जल्द ही इसका फैसला सामने आयेगा।

बुआ-भतीजे में मिलीभगत-भाजपा

वहीं भाजपा के यूपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि बुआ और भतीजे दोनों आपस में मिले हुए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साढे चार सालों में इस मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी, लोग समझ चुके हैं कि बुआ और भतीजे में आपसी मिलीभगत है।

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English summary
Big names of BSP likely to feel the head ahead of UP assembly poll. SP government likely to take serious action against them.
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