बलिया हत्याकांड: अखिलेश ने कहा- अब देखें क्या एनकाउंटर वाली सरकार अपने लोगों की गाड़ी भी पलटती है या नहीं
लखनऊ। बलिया हत्याकांड मामले में सियासत शुरू हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर योगी सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को ट्वीट करते हुए कहा, ''बलिया में सत्ताधारी भाजपा के एक नेता के, एसडीएम और सीओ के सामने खुलेआम, एक युवक की हत्या कर फ़रार हो जाने से उप्र में क़ानून व्यवस्था का सच सामने आ गया है।'' अखिलेश ने कहा, ''अब देखें क्या एनकाउंटर वाली सरकार अपने लोगों की गाड़ी भी पलटाती है या नहीं।''

बलिया में भाजपा नेता ने गोली मारकर की युवक की हत्या
बलिया में गुरुवार की दोपहर ग्राम सभा दुर्जनपुर और हनुमानगंज की कोटे की दो दुकानों के आवंटन के लिए पंचायत भवन पर बैठक का आयोजन किया गया। इसमें एसडीएम बैरिया सुरेश पाल, सीओ बैरिया चंद्रकेश सिंह, बीडीओ बैरिया गजेन्द्र प्रताप सिंह के साथ ही रेवती थाने की पुलिस फोर्स मौजूद थी। दुकानों के लिए चार स्वयं सहायता समूहों ने आवेदन किया। दुर्जनपुर की दुकान के लिए आम सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में दो समूहों मां सायर जगदंबा स्वयं सहायता समूह और शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह के बीच मतदान कराने का निर्णय लिया गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि जिसके पास आधार कार्ड या अन्य कोई पहचान पत्र होगा वही मतदान करेगा।

विवाद के बाद शख्स की गोली मारकर हत्या
एक पक्ष के पास तो आधार कार्ड था, लेकिन दूसरे पक्ष के पास कोई पहचान पत्र नहीं था। इसी बात पर दोनों पक्षों के वाद-विवाद शुरू हुआ। बात इतनी बढ़ी कि लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चलने लगा। इसी बीच एक पक्ष की ओर से फायरिंग शुरू हो गई। दुर्जनपुर के 46 वर्षीय जयप्रकाश उर्फ गामा पाल को ताबड़तोड़ चार गोलियां मार दी गईं। जयप्रकाश को गोली चलते ही भगदड़ मच गई। घायल जयप्रकाश को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या का आरोप भाजपा नेता धीरेंद्र सिंह पर लगा है। धीरेंद्र सिंह मौके से फरार हो गया।
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एसडीएम, सीओ समेत मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी सस्पेंड
इस मामले में सीएम योगी ने संज्ञान लेते हुए घटनास्थल पर मौजूद एसडीएम, सीओ सहित सभी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। साथ ही आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए वहां मौजूद अफसरों के भूमिका की जांच के भी निर्देश दिए हैं। तनाव को देखते हुए गांव में कई थानों की पुलिस तैनात कर दी गई है। इस मामले में मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह सहित आठ नामजद और 25 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।












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