Anupriya Patel : जानिए कौन हैं अनुप्रिया पटेल, जिनके मोदी कैबिनेट में शामिल होने की चल रही चर्चा ?
नई दिल्ली, 06 जुलाई: संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में विस्तार की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। दरअसल, पिछले महीने ही अनुप्रिया पटेल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बता दें, 2014 में जब मोदी सरकार बनी थी तब अनुप्रिया को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन 2019 में जब दूसरी बार मोदी सरकार बनी तो अपना दल (एस) को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। अब एक बार फिर कैबिनेट विस्तार की चर्चा के बीच अनुप्रिया को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना करीब-करीब तय माना जा रहा है।
Oneindia Hindi आपको अनुप्रिया पटेल के राजनीति में शामिल होने से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने तक का सफर बता रहा है।

यूपी के कानपुर में हुआ था अनुप्रिया पटेल का जन्म
अनुप्रिया सिंह पटेल का जन्म 28 अप्रैल 1981 को उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में हुआ था। अनुप्रिया पटेल सोन लाल पटेल की बेटी हैं। सोने लाल ने यूपी में अपना दल राजनीतिक पार्टी की स्थापना की थी। अनुप्रिया ने मनोविज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की है और एमबीए भी किया है। अनुप्रिया राजनीति में नहीं आना चाहती थीं, उनकी इसमें कभी दिलचस्पी नहीं रही। ये बात वह खुद कह चुकी हैं। पिता सोने लाल पटेल की अचानक मौत के बाद अनुप्रिया ने राजनीति में कदम रखा और पार्टी को संभाला।
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पिता की अचानक मौत के बाद अनुप्रिया ने संभाली पार्टी की कमाल
अनुप्रिया पटेल के पिता सोने लाल अपने समय के बड़े नेताओं में शामिल थे। उन्हें बहुजन समाज पार्टी के संस्थापकों में से एक भी माना जाता है, लेकिन आगे चलकर बसपा प्रमुख मायावती से मतभेद के कारण उन्होंने बीएसपी से खुद को अलग कर लिया। सोनेलाल पटेल ने 1955 में 'अपना दल' की स्थापना की, जो अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करती थी। सोनेलाल पटेल की 2009 में एक हादसे में मौत हो गई। इसके बाद अनुप्रिया ने पार्टी में कदम रखा और राष्ट्रीय महासचिव बन गईं। अनुप्रिया और उनकी तीन बहनों ने ही सोनेलाल पटेल की अर्थी को कंधा दिया था।

अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से सांसद बनीं
अनुप्रिया ने जब राजनीति में कदम रखा, तब उनकी उम्र 28 वर्ष थी। अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल के हाथों में पार्टी की कमान थी। अनुप्रिया अपनी मां को सहयोग करती रहीं। आगे चलकर परिवार में तनाव हुआ और पार्टी में दो फाड़ हो गया। हालांकि, अनुप्रिया ने कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे। उत्तर प्रदेश में 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में अनुप्रिया ने वाराणसी के नजदीक रोहनिया विधानसभा से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2014 में पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया और अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से सांसद बन गईं।

साल 2016 में अनुप्रिया ने बनाई 'अपना दल (सोनेलाल)'
अनुप्रिया को सांसदी मिली तो रोहनिया विधानसभा की सीट खाली हो गई। इस सीट पर उपचुनाव हुए अनुप्रिया की मां खुद रोहनिया से चुनाव लड़ीं। हालांकि, अनुप्रिया चाहती थीं कि उनके पति आशीष सिंह पार्टी के उम्मीदवार बनें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद परिवार में और तनाव पैदा हो गया। ये तनाव ऐसा बढ़ा कि अनुप्रिया और मां कृष्णा पटेल पार्टी के अध्यक्ष पद पर अपना-अपना दावा करने लगीं। कृष्णा पटेल ने चुनाव में मिली हार के बाद कुछ महीनों में साल अनुप्रिया पटेल और उनके छह सहयोगियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि, तब तक अनुप्रिया पटेल अपनी अलग पहचान बना चुकी थीं। वह केंद्र में मंत्री भी थीं। साल 2016 में अनुप्रिया ने अपनी अलग पार्टी 'अपना दल (सोनेलाल)' का गठन किया। हालांकि, वह पार्टी की अध्यक्ष 2018 में बन सकीं। उधर, अनुप्रिया पटेल और उनकी मां पार्टी पर अधिकार को लेकर हाईकोर्ट भी पहुंच गए। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। बता दें, इस विवाद की वजह से कृष्णा सिंह ने भी अब 'अपना दल (कमेरावेदी)' नाम से एक नई पार्टी का गठन कर लिया है।












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