मुख्तार पर सख्त से नरम होने में दो दिन भी नहीं लगे अखिलेश को

लखनऊ। समाजवादी पार्टी में कौमी एकता के विलय के बाद जिस तरह से सीएम अखिलेश यादव ने बलराम यादव को बाहर का रास्ता दिखाया उसके बाद माना जा रहा था कि अखिलेश नयी राजनीति की शुरुआत करेंगे। लेकिन महज चौबीस घंटे के भीतर अखिलेश ने इस विलय का समर्थन करके अपनी मजबूरी जाहिर कर दी है।

अखिलेश के तेवर बदल रहे हैं सपा की कार्यशैली को

Akhilesh came forward for the damage control over Mukhtar Ansari issue

अखिलेश यादव ने मुख्तार अंसारी की पार्टी के सपा में विलय के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि वह इससे नाराज नहीं हैं। यही नहीं उन्होंने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी के भीतर का मामला है औऱ पार्टी के फैसले को सब मानेंगे. उन्होने कहा कि मीडिया ने जानबूझकर इस मुद्दे पर बहस खड़ी की है।

हालांकि अखिलेश यादव ने बलराम यादव के खिलाफ कार्यवाही पर कुछ भी नहीं बोला। लेकिन माना जा रहा है कि जिस तरह से अखिलेश यादव ने सख्त तेवर दिखाये थे उससे पार्टी के भीतर घमासान मच गया था, उसे देखते हुए अखिलेश डैमैज कंट्रोल में जुटे हैं।

यूपी में पिछले कुछ दिनों में सियासी समीकरण पूरी तरह से बदलने लगे है। स्वामी प्रसाद मौर्या ने बसपा का साथ छोड़ तो दिया लेकिन सपा उन्हें खुले मन से स्वीकार करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक तरफ जहां उन्हें अच्छा नेता करार दिया तो शिवपाल और आजम खान ने उनके इस फैसले का स्वागत किया।

मायावती ने जिस तरह से सपा पर परिवारवाद पर आरोप लगाया उसपर अखिलेश यादव ने अपने अंदाज में ही जवाब दिया। वो बोले बच्चों के बच्चों की क्या बात करें हमारे बच्चे तो बहुत छोटे हैं अभी उन्हें यहां तक पहुंचने में अभी 12 से 15 साल लगेंगे। तब कौन कहां होगा किसे पता।

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