परिवारवाद पर अखिलेश का पलटवार, कहा- परिवार वाले ही समझ सकते हैं परिवार के सदस्य का दर्द
ललितपुर, 02 दिसंबर: विजय रथ यात्रा लेकर समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव गुरुवार 02 दिसंबर को ललितपुर पहुंचे। यहां जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। जनसभा में आई भीड़ को देखकर अखिलेश ने कहा कि आज का मौसम अचानक बदला गया। लेकिन मौसम कैसा भी हो ये जो जनसमर्थन दिखाई दे रहा है ये जो गुस्सा दिखाई दे रहा है। ये बता रहा है कि लखनऊ में जो बैठे है उनका मौसम खराब होगा अब। अखिलेश ने कहा कि उनकी कोई चाल चलने वाली नहीं है।

अखिलेश यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की जनता भी उनके जुमले बहुत सुन लिए। अब यहां जुमले भी नहीं चलने वाले है। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग सत्ता में हैं, वो मुझ पर हमेशा से परिवारवाद की राजनीति के नाम पर हमला करते रहे हैं। लेकिन मैं आपसे कहता हूं कि सिर्फ परिवार वाला व्यक्ति ही घर के हर सदस्य के दर्द को समझ सकता है। यादव ने कहा कि अभी-अभी नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार आज सबसे ज्यादा गरीब लोग बुंदेलखंड में हैं और बुंदेलखंड में भी अगर सबसे ज्यादा गरीब लोग हैं तो वो महुआ और ललितपुर में हैं।
अखिलेश ने ललितपुर में बोलते हुए कहा कि बुदेंलखंड के लोगों को गरीबी और भूख से निजात दिलाने का काम समाजवादी पार्टी के लोग करेंगे। कहा कि आपको याद होगा कि समाजवादी सरकार में समाजवादी पैकट बाटने का काम किया गया। पैकेट में आटा, चावल, आलू और सरसो का तेल भी था। कभी गरीब ने यह नहीं सोचा होगा कि सरकार की तरफ से घी और दूध का मिलक पाउडर भी मिल जाएगा। समाजवादी लोगों ने उस पैकेट को बाटने का काम किया। हमारी ही सरकार में गरीबों को आवास मिले।
बीजेपी का साढ़े चार साल का कार्यकाल आपने देख लिया होगा। इतनी दुख परेशानी गरीबों को कभी नहीं मिली जितनी इस सरकार ने दी है। अखिलेश यादव ने लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा कि वो तस्वीर कौन भूल जाएगा, जब लॉकडाउन लगा था और हमरे मजदूरों भाइयों को दूसर राज्यों से पैदा आना पड़ रहा था। कहा कि जब देश का बटवारा हुआ उस वक्त भी ऐसा नहीं हुआ। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने रास्त रोक दिए और किसी भी मजदूर भाइयों को उत्तर प्रदेश में घुसने नहीं दिया। ना जाने कितने दिन वो प्रदेश की सीमा पर खड़े रहे।
अखिलेश ने कहा कि अगर सरकार चाहती तो मजदूरों को पैदल नहीं चलता। अगर समाजवादी पार्टी की सरकार होती तो मजदूरों को पैदल नहीं चलना पड़ता। हम बस, सरकारी गाड़ी यही नहीं, डीएम की गाड़ी में मजदूर भाइयों को घर तक छुड़वाती। ये बात में इसलिए बता रहा हूं कि जो लोग सत्ता में हैं, वो मुझ पर हमेशा से परिवारवाद की राजनीति के नाम पर हमला करते रहे हैं। लेकिन मैं आपसे कहता हूं कि सिर्फ परिवार वाला व्यक्ति ही घर के हर सदस्य के दर्द को समझ सकता है।












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