बुंदेलखंड खाद संकट : ललितपुर में पीड़ित किसान परिवारों से मिलीं प्रियंका गांधी
ललितपुर, 29 अक्टूबर: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेरने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती हैं। यही वजह है कि प्रियंका ने अब खाद का संकट झेल रहे बुंदेलखंड का रुख कर लिया है, जहां वह पीड़ित किसान परिवारों से मुलाकात की। प्रियंका गांधी वाड्रा शुक्रवार को ट्रेन से ललितपुर पहुंची हैं। बता दें, बुंदेलखंड में किसानों को इन दिनों खाद का किल्लत से जूझना पड़ रहा है। बीते दिनों ललितपुर में इस वजह से दो किसानों की मौत हो गई है। एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों ने आरोप लगाया कि खाद न मिलने की वजह से वो हताश था, जिसकी वजह से उसने फांसी लगा ली। वहीं, प्रशासन ने इस आरोप को नकार दिया है। उधर, खाद के लिए तीन दिन से कतार में लग रहे एक किसान की मौत हो गई।
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खाद की किल्लत से जूझ रहा बुंदेलखंंड
बता दें, बुंदेलखंड में किसानों को इन दिनों खाद का किल्लत से जूझना पड़ रहा है। बीते दिनों ललितपुर में इस वजह से दो किसानों की मौत हो गई है। एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों ने आरोप लगाया कि खाद न मिलने की वजह से वो हताश था, जिसकी वजह से उसने फांसी लगा ली। वहीं, प्रशासन ने इस आरोप को नकार दिया है। उधर, खाद के लिए तीन दिन से कतार में लग रहे एक किसान की मौत हो गई।
पीड़ित किसान परिवार से मिलेंगी प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी वाड्रा ने मृतक किसानों के परिवार से मिलने आज ललितपुर पहुंची हैं। कांग्रेस महासचिव शुक्रवार सुबह 7.07 बजे साबरमती एक्सप्रेस से रेलवे स्टेशन पर उतरीं। यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य जैन सहित कई कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। प्रियंका मृतक किसानों के परिवार से मिलने के लिए पाली और नया गांव पहुंची। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सभी पीड़ित किसान परिवारों से मिलकर उनकी पीड़ा साझा की और सभी किसानों के परिवारों का कर्ज चुकाने का वादा किया।
प्रियंका गांधी ने इससे पहले गुरुवार को इस मुद्दे पर ट्वीट कर भाजपा सरकार पर हमला बोला था। प्रियंका ने ट्वीट में लिखा, ''किसान मेहनत कर फसल तैयार करे तो फसल का दाम नहीं। किसान फसल उगाने की तैयारी करे, तो खाद नहीं। खाद न मिलने के चलते बुंदेलखंड के 2 किसानों की मौत हो चुकी है। लेकिन किसान विरोधी भाजपा सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा है। इनकी नीयत और नीति दोनों में किसान विरोधी रवैया है।''












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