Papaya Farming: Kushinagar के इस किसान ने की पहली बार पपीते की खेती, बताए इसके फायदे
Papaya Farming In Kushinagar: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के मडार बिन्दुवलिया के मलाही पट्टी के रहने वाले दिनेश कुशवाहा इन दिनों पपीते की खेती से काफी खुश नजर आ रहे हैं। उन्होंने वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में पपीते की खेती के फायदे बताए और अन्य किसानों से इसे करने की अपील की।
बाबा से मिली प्रेरणा
दिनेश बताते हैं पीपते की खेती करने का विचार मेरा नहीं था। मैं अन्य फसले यहां उगा रहा था। एक दिन बाबा ने पपीते की खेती करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पीपीते की खेती फायदेमंद है एक बार इसे भी कर के देखो।
पहली बार की पपीते की खेती
दिनेश ने बताया कि वह पहली बार पपीते की खेती कर रहे हैं। लेकिन पहली बार में ही अनुभव अच्छा रहा।

बीस डिसमिल जमीन में की खेती
दिनेश बताते हैं कि उन्होंने बीस डिसमिल जमीन में पपीते की खेती की है। जिसमें लागत चौबीस हजार रुपये आए हैं।
मार्च में लगाया था पौधा
दिनेश ने बताया कि उन्होंने मार्च माह में पपीते का पौधा लगया था। जून में इसमें फल लगा और अक्टूबर से यह पकना शुरु हो गया।
चालीस से पचास किलो पपीता एक पौधे से निकल जाता है
दिनेश बताते हैं कि एक पौधे से करीब चालीस से पचास किलो पपीता निकल जाता है। ऐसे में बीस डिसमिल में कई टन पपीते निकल जाते हैं।
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अच्छा है मुनाफा
दिनेश बताते हैं कि हम थोक व्यापारियों को और कभी कभी फुटकर में पपीता निकटवर्ती बाजार में बेच देते हैं। थोक व्यापारियों केा तीस से चालीस रुपए और फुटकर में पचास से साठ तक बेच देते हैं।
लागत का कई गुना मुनाफा
दिनेश बताते हैं कि पपीता तैयार है इसे हम घुघली , कप्तानगंज, परतावल सहित अन्य नजदीकी बाजारों में बेच रहे हैं। ऐसे में लागत को दो से तीन गुना ज्यादा मुनाफा हो रहा है।
किसानो से की अपील दिनेश ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि पपीते की खेती फायदेमंद है। इसे अन्य किसानों को करना चाहिए जिससे उसकी आर्थिक स्थिति ठीक हो सके।












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