शादी के उपहार में दूल्हा-दुल्हन को मिले 5 दिल, 30 किडनी, 140 आंखें!
Barn News, बारां। शादी में दूल्हा-दुल्हन को मिलने वाले तोहफे भी खास मायने रखते हैं। हर कोई इस खास मौके पर शानदार उपहार देने का प्रयास करता है, मगर यह मामला थोड़ा अनूठा है। इसमें दूल्हा-दुल्हन ने पहले ही तय कर दिया था कि उन्हें शादी के उपहार में दिल, किडनी, आंखें आदि चाहिए।

चौकिएगा नहीं। हम बात अंगदान कर रहे हैं। इस शादी में मेहमानों ने अंगदान का फॉर्म भरकर दूल्हा-दुल्हन को उपहार भेंट किया है। ऐसे में बतौर शादी के तोहफे में इस नवदम्पती को 5 दिल, 30 किडनी और 140 आंखें मिली है। मतलब इतने अंगदान किए जाने के फॉर्म भरे गए हैं।

शादी के कार्ड के माध्यम से दिया गया संदेश
दरअसल, एक संस्था राजस्थान के कोटा संभाग में नेत्रदान, अंगदान व देहदान जागरुकता के लिए कार्य कर रही है। इसी संस्था से जुड़े टिंकू ओझा की शादी 20 जनवरी 2019 को गांव मुंडियर में हुई थी। मेहमानों को शादी के कार्ड के माध्यम से संदेश दिया गया था कि यदि वे दूल्हा-दुल्हन को कोई उपहार देना चाहते हैं तो अंगदान, नेत्रदान व देहदान का संकल्प पत्र भरकर देवें। शादी के कार्ड पर छपा ये अनूठा संदेश पढ़कर कई मेहमानों ने शादी में आने से इनकार दिया। लोग जागरुकता के अभाव में ऐसा सोचने लगे कि शादी में गए तो उपहार में ऐसा संकल्प भेंट करना पड़ेगा। इससे अच्छा तो शादी में जाएं ही नहीं।

लोगों को अंगदान के प्रति किया जागरूक
यह बात दूल्हा टिंकू ओझा को पता लगी तो शादी से पहले शाइन इंडिया फाउंडेशन के 5 सदस्यों की टीम को गांव मुंडियर बुलाकर लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक किया गया। जब शादी हुई तो लोगों ने जागरूकता दिखाई और 5 दिल,30 किडनी,140 आँखें दान करने के संकल्प पत्र भरकर बतौर उपहार दूल्हा टिंकू ओझा व दुल्हन तृप्ति को भेंट किए गए। इस जोड़े ने भी फेरे से पहले 2000 लोगों के बीच अंगदान का संकल्प लिया।

मां की मौत ने बदल दी सोच
टिंकू ओझा ने बताया कि कुछ समय पहले उनकी मां विद्या देवी की मौत हो गई थी। उसके बाद मैंने फैसला किया कि समाज के लिए नेक काम करूंगा। नेत्रदान, देहदान व अंगदान मुझे सबसे नेक काम लगा। इसलिए शाइन इंडिया फाउंडेशन से जुड़ गया। शादी में मेहमानों के अलावा परिवार के रामप्रसाद, मुरारी लाल, मानक चंद, सुरेश चंद, ओमप्रकाश, गोपाल, मनोज, पुरूषोत्तम, पवन, जितेंद्र, रमेशचंद्र व टिंकू के पिताजी राजेन्द्र ओझा, सास वैजंती व ससुर मोहनलाल ने भी अंगदान के संकल्प पत्र भरे हैं। संकल्प पत्र भरने वाले व्यक्तियों को भविष्य में जब भी निधन होगा तब निर्धारित समवाधि में इनके अंग दान कर दिए जाएंगे।
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