नेपाल के बच्चों के नाम एक सूफी शाम, कविता सेठ ने बताया - 'खुदा वही है'
वन इंडिया डॉट कॉम के सौजन्य से बैंगलोर के प्रतिष्ठित एनजीओ परिक्रमा ने नेपाल के बच्चों के लिए सहायता राशि इकट्ठी करने का ज़िम्मा उठाया और भरपूर सहयोग दिया गायिका कविता सेठ ने। कविता सेठ ने अपने ग्रुप के साथ बैंगलोर में एक सूफीयाना शाम लोगों के नाम की और माहौल को रूहानी कर अपनी गायकी से नेपाल में बन रहे एक स्कूल की सहायता की।

ओजस अधिया, संगल्प सेनगुप्ता, अरूण सोलंकी, पंकज नाथ, देबरप्रीतो साहा ने इस शाम में कविता सेठ का बखूबी साथ निभाया। शुरूआत हुआ खुदा को ढूंढने के सूफीयाना कलाम से जिसके बोल थे -
बदल रहा है जो शब- सहर में...
खुदा वही है
है जिसका जलवा नज़र नज़र में...
खुदा वही है
इसके बाद एक प्यार का नगमा है और तू प्यार का सागर है जैसे फिल्मी गीतों को सूफी की रूमानियत से बहुत ही अच्छे से जोड़ा जिसने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। लेकिन बात अगर सूफी की हो और अमीर खुसरो की ना हो, तो कुछ छूटता है। इसलिए छाप तिलक की थाप पर मोसे नैना मिलाइके जैसे ही शुरू हुआ तो दर्शकों ने भी तालियों की थाप से ग्रुप का साथ दिया।
शाम का अंत यूं तो कोई होने नहीं देना चाहता था लेकिन फिर भी वेक अप सिड के इकतारा ने सिलसिला आगे बढ़ाया और नुसरत फतेह अली खान के गीतों से इस सुरीली महफिल को अंजाम मिला।












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