kasganj altaf case : मायावती ने यूपी सरकार को घेरा, उच्चस्तरीय जांच की मांग
कासगंज, 11 नवंबर: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में हिरासत के दौरान हुई युवक को लेकर पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वहीं, इस मामले में सियासत भी शुरू हो गई है। राजनीतिक दलों के नेता इस मामले में यूपी सरकार को घेरने में जुट गए हैं। बसपा सु्प्रीमो मायावती ने इस मामले में सरकार से उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को सख्त सजा देने और पीड़ित परिवार की मदद की मांग की है। इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी।

यूपी सरकार आएदिन कस्टडी में मौत रोकने में विफल: मायावती
मायावती ने गुरुवार को एक ट्वीट में कहा, ''कासगंज में पुलिस कस्टडी में एक और युवक की मौत अति-दुखद व शर्मनाक। सरकार घटना की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को सख़्त सजा दे तथा पीड़ित परिवार की मदद भी करे। यूपी सरकार आएदिन कस्टडी में मौत रोकने व पुलिस को जनता की रक्षक बनाने में विफल साबित हो रही है यह अति-चिन्ता की बात।'' इससे पहले बुधवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट में कहा, ''कासगंज में पूछताछ के लिए लाए गए युवक की थाने में मौत का मामला बेहद संदेहास्पद है। लापरवाही के नाम पर कुछ पुलिसवालों का निलंबन सिर्फ दिखावटी कार्रवाई है। इस मामले में इंसाफ व भाजपा के राज में पुलिस में विश्वास की पुनर्स्थापना के लिए न्यायिक जांच होनी ही चाहिए।''
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क्या है पूरा मामला ?
अल्ताफ पुत्र चाहत मियां उर्फ चांद मियां नगला सैय्यद अहरोली का निवासी था। वह घरों में पेंटिंग का काम करता था। वह टाइल्स की दुकान पर रहकर मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। बीत दिनों नाबालिग लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने अल्ताफ को उठा लिया। इस दौरान अल्ताफ की संदिग्ध परिस्थितयों में मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि अल्ताफ ने बाथरूम में जाकर फांसी लगा ली, जिससे उसकी मौत हुई। वहीं, परिजनों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया है। इस मामले में एसपी ने लापरवाही के चलते 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया है। मामले ने तूल पकड़ लिया है।












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