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नसीम सोलंकी के आंसू बीजेपी की सियासी किलेबंदी पर पड़े भारी, सीसामऊ में यूं ही नहीं हारी BJP, जानें वजह

Sisamau Assembly by-election 2024: उत्तर प्रदेश में उपचुनाव के दौरान कानपुर जनपद की सीसामऊ सीट भी काफी चर्चा में रही। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2022 में विधायक बने इरफान सोलंकी पर मुकदमा दर्ज होने के बाद सीट खाली हो गई थी।

ऐसे में इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को उम्मीदवार बनाया था। शनिवार को मतगणना के दौरान नसीम सोलंकी ने बीजेपी के उम्मीदवार सुरेश अवस्थी को 8564 वोटों से हराया। पत्नी ने भाजपा उम्मीदवार को अपने पति इरफान सोलंकी से ज्यादा वोटों से हराया।

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इस विधानसभा पर उपचुनाव के दौरान भाजपा द्वारा की गई राजनीतिक किलेबंदी पर सपा प्रत्याशी कैसे भारी पड़ीं? भारतीय जनता पार्टी से कहां चूक हुई और हार की वजह क्या रही, इस पर खूब चर्चा हो रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि भाजपा की हार को लेकर लोगों में क्या चल रहा है?

टिकट मिलने से लेकर चुनाव जीतने तक निकले आंसू
समाजवादी पार्टी द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नसीम सोलंकी सबके सामने रोने लगीं। ऐसा सिर्फ एक बार नहीं बल्कि चुनाव प्रचार के दौरान कई बार हुआ जब नसीम सोलंकी की आंखों से आंसू बह निकले। कहा जा रहा है कि ये आंसू बीजेपी उम्मीदवार के तेवरों पर भारी पड़ गए।

नसीम सोलंकी के आंसुओं ने न केवल मुसलमानों को बल्कि हिंदुओं को भी अपने पक्ष में करने में मदद की। नसीम सोलंकी अपने आंसू बहाकर और अपने पति इरफान सोलंकी पर सरकार द्वारा किए गए अत्याचारों को भुनाने में सफल रहीं और मुस्लिम के साथ ही हिंदू (खास कर दलित) मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहीं।

शिवपाल और डिंपल यादव बने गेम चेंजर
इस विधानसभा सीट पर शिवपाल यादव ने उपचुनाव के दौरान काफी समय दिया। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बड़े-बड़े जनसभा किए गए। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बार रैली और एक बार रोड शो किया। इसके अलावा दोनों डिप्टी सीएम ने जनसभा को संबोधित किया।

लेकिन इन सबके बावजूद शिवपाल यादव छोटी-छोटी जनसभाएं करके हिंदू वोटरों को अपने पक्ष में करने में सफल रहे। आखिरी दिन डिंपल यादव खुद कानपुर में रोड शो करने पहुंचीं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शिवपाल और डिंपल यादव इस सीट पर गेम चेंजर साबित हुए।

राकेश सोनकर का टिकट काटना पड़ा भारी
इस विधानसभा सीट पर करीब 60000 दलित मतदाता हैं। इस सीट पर पहले पूर्व विधायक राकेश सोनकर को टिकट दिए जाने की बात सामने आई थी और उन्होंने अपनी दावेदारी भी प्रस्तुत की थी। लेकिन इन वक्त पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए सुरेश अवस्थी को टिकट दे दिया गया।

कहा जा रहा है कि राकेश सोनकर का टिकट कटने से दलित मतदाता भी नाराज हो गए। दलित मतदाता भाजपा के प्रति नाराज होने लगे और मतदान तक भाजपा नेताओं ने दलित मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि सुरेश अवस्थी को टिकट मिलने के बाद भाजपा अंदरखाने में भी नाराजगी देखने को मिली।

भारतीय जनता पार्टी से बड़े नेताओं ने प्रचार किया लेकिन छोटे नेता प्रचार करने के लिए नहीं उतरे। मतदान के समय भी भारतीय जनता पार्टी के लोगों में अधिक सक्रियता नहीं देखी गई जबकि पुलिस द्वारा रोक-टोक किये जाने के मामले को भी सपा ने खूब प्रचारित किया।

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