Exclusive: कानपुर ने खोज निकाला देश का पहला 'वाटर एटीएम'

इसके ज़रिए सिर्फ पांच रुपए में बीस लीटर साफ पानी मिल रहा है। कारोबार के साथ सामाजिक सरोकार से जुड़ी इस नायाब पहल को गरीब-अमीर सभी ने सिर आंखों पर लिया है। 'अच्छे दिन' भले ही अभी धीरे-धीरे आएं पर कानपुर में हाल में हुए कुछ बदलावों से नई सरकार की नई झलक जनता देखने लगी है।
त्रिवेणी नगर निवासी युवा प्रोफेशनल वैभव बाजपेयी और रिषभ सक्सेना ने वाटर एटीएम का पहला प्लांट इंदिरा नगर में लगाया है, जिसका नाम है अक्षय जल। छोटा सा यह प्लांट चीन का है, जिसके लिए उन्होंने चीन की कंपनी बेजा बैटर के साथ करार किया है। कंपनी के कर्ताधर्ता एनआरआई अक्षया भार्गव हैं। 25 लाख रुपए के इस प्लांट की क्षमता 30 हजार लीटर प्रतिदिन की है। इससे 20-20 लीटर के 1500 जार भरे जा सकते हैं।
बोरिंग के इस पानी को 11 स्तरों से गुजारा जाता है, तब तैयार होता है मिनरल वाटर। इसे बेचने के लिए उन्होंने दो रास्ते अपनाए हैं। एक वाटरएटीएम और दूसरा होम डिलीवरी। जार की सिक्योरिटी छोड़ दें तो मात्र 50 रुपए में वाटर एटीएम मिल जाता है। मशीन में कार्ड टच करने के साथ जार टैब के नीचे लगाइए और बीस लीटर पानी ले जाइ। इसकी कीमत सिर्फ 5 रुपए जबकि होम डिलीवरी के रेट अलग रखे गए हैं।
यदि पानी पर नई-नई योजनाओं पर आज देशभर में काम चल रहा है, तो उसके पीछे वजह है 'जल ही जीवन है'। देश की कई शहरों में पानी की पहुंच रुपए खर्च कर ही उपलब्ध हो रही है। कहीं टैंकर से लोगों को पानी नसीब हो रहा है, तो कहीं जार के सहारे लोगों के गले तर हो रहे हैं।
आइए जानें कितना जरूरी है पानी
5 फीसदी बच्चे हर साल मर जाते हैं गंदा पानी पीकर।
21 फीसदी बीमारियों की जड़ होता है प्रदूषित पानी
1600 लोग रोज डायरिया से हो रहे हैं मौत का शिकार।
प्रदूषित पानी पीकर बीमार बच्चों की वजह से 443 अरब स्कूली दिनों का नुकसान।
जलजनित बीमारियों की वजह से हर 21 सेकेंड में दम तोड़ रहा है एक बच्चा।
40 अरब घंटे सिर्फ पानी भरने में बर्वाद कर देती हैं महिलाएं।
आंकड़े- विश्व स्वास्थ्य संगठन।












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