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जोधपुर में सुनियोजित दंगे : कौन थे स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा जिनके नाम पर लोगों ने की हिंसा?

जोधपुर, 4 मई। राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में ईद 2022 के मौके पर साम्प्रदायिक दंगे भड़क हैं। करौली हिंसा के ठीक एक माह बाद जोधपुर में भी दंगे प्रारम्भिक तौर पर सुनियोजित लग रहे हैं। जोधपुर में जालोरी गेट सर्किल पर स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा की प्रतिमा पर झंडा लगाने की बात से सोमवार रात को शुरू हुआ विवाद ईद के दिन मंगलवार सुबह उग्र हो गया।

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लोगों ने जमकर हुड़दंग मचाया। एटीएम, दुकानों व घरों में तोड़फोड़ की। पत्थर फेंके। एसिड अटैक तक किया गया। जोधपुर पुलिस ने 250 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर की है। जोधपुर के हिंसा की आग में झुलसने पर 36 घंटे तक कर्फ्यू लगाना पड़ा। इंटरनेट सेवाएं भी बंद रही। मंगलवार सुबह ईद की नमाज तक माहौल ठीक था। नमाज होते ही जालोरी गेट सर्किल पर झंडा हटाने की बात को लेकर उपद्रवी हुडदंग करने लगे।

जोधपुर दंगों को सुनियोजित इसलिए भी कहा जा रहा क्योंकि पुलिस के खदेड़ते ही तो दंगाइयों ने पथराव शुरू कर दिया। हाथ से लाठी छीनकर पुलिस पर ही हमला कर दिया। भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा।

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जोधपुर पुलिस ने जिन उपद्रवियों को खदेड़ा वे जालोरी गेट से शनिश्चरजी के थान के रास्ते पर एटीएम, दुकान, शोरूम में तोड़फोड़ करने लगे। ए​क घर से तो एसिड फेंका गया। जिससे युवक का पैर जल गया।

जोधपुर के सोजती गेट, कबूतरों का चौक, पुष्टिकर स्कूल के आगे हनुमान चौक के बाहर व शाहपुरा में भी घरों पर पथराव किया गया। गाड़ियां जलाई गई तो दूसरा पक्ष भी सामने आ गया। दोपहर दो बजे तक ​तो स्थिति यह हो गई कि चार मई तक कर्फ्यू लगाना पड़ा।

जोधपुर हिंसा 2022 में अब तक 24 लोग घायल हुए हैं। दो की हालत गंभीर है। एक युवक को चाकू मार दिया गया, जो इतना गहरा उतरा कि निकालने के लिए आपरेशन करना पड़ा। पुलिस दस उपद्रवियों की पहचान कर चुकी है। तीन ने कुल 250 अज्ञात लोगों के खिलाफ 3 एफआईआर दर्ज की है।

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कौन थे बालमुकुंद बिस्सा?

बता दें कि स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा का जन्म 24 दिसम्बर 1908 को नागौर जिले के डीडवाना इलाके के पीलवा गांव में पुष्करणा ब्राह्मण के घर हुआ। पिता व्यापार के सिलसिले में कोलकाता रहते थे। ऐसे में बालमुकुंद बिस्सा की शिक्षा कोलकाता से हुई। साल 1934 में वे कोलकाता से जोधपुर लौटे और यहीं पर व्यापार करना शुरू कर दिया। .

बालमुकुंद बिस्सा महात्मा गांधी के विचारों से काफी प्रभावित थे। साल 1934 में उन्होंने चरखा एजेंसी और खादी भंडार की स्थापना की थी बिस्सा की 'जवाहर खादी' नाम की दुकान आजादी की लड़ाई में भाग लेने वाले क्रांतिकारियों के मिलने और रणनीति बनाने का ठिकाना बन गई थी।

उधर, साल 1942 में मारवाड़ यानी जोधपुर के आस-पास के इलाकों में जयनारायण व्यास के नेतृत्व में जन आंदोलन चल रहा था। बालमुकुंद बिस्सा ने इस आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। तब देश में आजादी की लड़ाई आखिरी मोड़ पर थी।

अंग्रेज सरकार ने बढ़ते आंदोलन को दबाने के लिए 9 जून 1942 को 'भारत रक्षा कानून' के तहत बालमुकुंद बिस्सा को जेल में डाल दिया। वे लंबे समय तक जोधपुर की जेल में बंद रहे। इस दौरान उन्होंने कैदियों को मिलने वाले खराब भोजन के खिलाफ जेल में ही गांधीवादी तरीके से भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।

बिस्सा को जून के महीने में गिरफ्तार किया गया था। भीषण गर्मी और भूख हड़ताल की वजह से उनका स्वास्थ्य गिरने लगा। बाद में उनकी तबीयत बहुत बिगड़ गई। इलाज़ के लिए उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका और मात्र 34 साल की उम्र में ही 1942 में उनका निधन हो गया था।

जोधपुर के जालोरी गेट इलाके में स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा की प्रतिमा है, जिस पर परशुराम जयंती पर ब्राह्मण समाज के लोगों ने भगवा ध्वज लगा दिए थे, जबकि ईद के मौके पर यहां मुस्लिम समुदाय अपने ध्वज लगाता आया है। सोमवार को इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा तो पुलिस ने बालमुकुंद बिस्सा की प्रतिमा पर तिरंगा लगा दिया, लेकिन देर रात समुदाय विशेष ने इसपर अपने धर्म का ध्वज लगा दिया। यहीं से बवाल की शुरुआत हुई।

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