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जोधपुर : DRDO वैज्ञानिकों ने IAF के फाइटर विमानों को दुश्मन के रडार से बचाने की तकनीक विकसित की

जोधपुर, 21 अगस्त। डीआरडीओ की जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने एयरफोर्स के फाइटर विमानों को दुश्मन के रडार से बचाने के लिए ख़ास स्वदेशी तकनीक तैयार की है। जोधपुर में विशेष मेटल फाइबर विकसित किया है। चैफ फाइबर के माध्यम से विमान दुश्मन के रडार को चकमा देगा। इससे रडार बेस्ड मिसाइल विमान को ट्रैक नहीं कर सकेगी। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस तकनीक को दो स्वदेशी कंपनियों को ट्रांसफर किया है।

चैफ खरीदने पर एयरफोर्स सालाना सौ करोड़ से ज्यादा का खर्च

चैफ खरीदने पर एयरफोर्स सालाना सौ करोड़ से ज्यादा का खर्च

एयरफोर्स इन कंपनियों को सीधे ऑर्डर देगा। चैफ खरीदने पर एयरफोर्स सालाना सौ करोड़ से भी ज्यादा खर्च करता है, अब आधे पैसे ही खर्च होंगे। अभी ये एयरफोर्स के जगुआर विमान में उपयोग में आएगा। विमानों में लगने वाले काउंटर मेजर डिस्पेंडिंग सिस्टम यानी दुश्मन की रडार आधारित मिसाइल से बचाने वाला उपकरण होता है। ये विमान के इंफ्रारेड व एंटी रडार से विमान को बचाएगी।

50 करोड़ रुपए व करोड़ों के विमान बचेंगे

50 करोड़ रुपए व करोड़ों के विमान बचेंगे

कुमार ने बताया कि हमने इसे विकसित करने के लिए 4 वर्ष की समय सीमा तय की थी, लेकिन हमारी टीम ने अथक प्रयास से इसे सिर्फ ढाई वर्ष में ही तैयार कर दिया। इससे न केवल समय पर देश में विकसित चैफ मिल सकेगा बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। इसके निर्यात की भी भरपूर संभावना है, लेकिन इस बारे में फैसला सरकार करेगी।

चैफ तकनीक - बाल से पतले करोड़ों फाइबर पार्टिकल की ओर मुड़ जाती है मिसाइल

चैफ तकनीक - बाल से पतले करोड़ों फाइबर पार्टिकल की ओर मुड़ जाती है मिसाइल

जोधपुर रक्षा प्रयोगशाला निदेशक रवींद्र कुमार ने बताया कि सही मायने में यह फाइबर है। बाल से भी पतले इस फाइबर की मोटाई महज 25 माइक्रोन होती है। फाइटर से इसके छोटे-छोटे टुकड़ों को दागा जाता है। इससे करोड़ों-अरबों टुकड़े आसमान में एक निश्चित ऊंचाई पर जाकर आपस में मिलकर बादलों के समान एक समूह बना लेते हैं। इस समूह से दुश्मन के रडार में फाइटर का आभास होता है। ऐसे में विमान की ओर दागी जाने वाली मिसाइल अपना लक्ष्य भटककर इस समूह से टकरा जाती है।

 विमान के पिछले हिस्से में लगता है चैफ

विमान के पिछले हिस्से में लगता है चैफ

चैफ को दागने के लिए विमान के पिछले हिस्से में लगाया जाता है। निश्चित दूरी पर विस्फोट होते ही चैफ के पार्टिकल आसमान में बिखर जाते हैं। थोड़ी देर में ये करोड़ों पार्टिकल आपस में मिलकर एक समूह के रूप में छा जाते हैं। जहाज की तरफ बढ़ रही मिसाइल इन्हें अपना लक्ष्य मान दिशा बदल इन पर टूट पड़ती है। इसके अब तक किए गए सारे परीक्षणों के नतीजे संतोषजनक रहे हैं।

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