देवघर रोपवे हादसा के लिए जिम्मेदार कौन ? जानिए
रांची, 13 अप्रैल: झारखंड की पवित्र बाबा नगरी देवघर में हुए रोपवे हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में 40 घंटे से भी ज्यादा का वक्त लग गया। इस दुर्घटना में कई लोग जख्मी हुए हैं, लेकिन सबसे दुखद बात ये है कि हादसे में जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनमें से दो ने मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जान गंवाई है। दुर्घटना रविवार को त्रिकुट पहाड़ पर तब हुआ था, जब रोपवे के केबल कार हवा में आपस में टकरा गए थे। राहत और बचाव का काम प्रशासन के कुप्रबंधन की वजह से काफी देर से शुरू हुआ। ऊपर से भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के लिए इस ऑपरेशन को अंजाम देने में वहां की भौगोलिक स्थिति की वजह से काफी दिक्कत आई। शुरू में तो देर से शुरू हुआ ऑपरेशन इसलिए रोकना पड़ा, क्योंकि हेलीकॉप्टर की हवा के चलते केबल कार बहुत ज्यादा असंतुलित हो रहे थे। लेकिन, फिर भी राहतकर्मियों ने पूरी जी-जान लगाकर हवा में करीब दो दिन से लटके पर्यटकों को उतारने में सफलता पाई। इस दौरान जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए लोगों पर क्या गुजरी, उसे बयां कर पाना आसान नहीं है। राहत की बात ये रही कि 45 टूरिस्ट बचा लिए गए, जिनमें से कुछ अभी भी डिहाइड्रेशन और शॉक की वजह से अस्पतालों में भर्ती हैं। सवाल है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार आखिर कौन है?

झारखंड सरकार का पल्ला झाड़ने की कोशिश
झारखंड के पर्यटन विभाग के सचिव राहुल सिन्हा के मुताबिक रविवार को रोपवे का एक्सल खिसक गया था, जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ। वैसे राज्य सरकार ने इस दुर्घटना से अपना पल्ला झाड़ते हुए रोपवे को चलाने वाली दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड पर दोष मढ़ने की कोशिश की है। पहले पर्यटन विभाग की ओर से कहा गया कि कंपनी का लाइसेंस 2019 में ही एक्सपायर कर गया था और कोविड के दौरान वह रिन्यू नहीं हो पाया। तो एक आम आदमी के नजरिए से पहला सवाल तो यही बनता है कि क्या फिर राज्य सरकार तमाशा देखने के लिए है? कोई निजी कंपनी बिना सरकार की जानकारी के आम लोगों की जान खतरे में डाल रही थी ?

दामोदर इंफ्रा का कहना है कि संचालन की अनुमति थी
दूसरी तरफ दामोदर इंफ्रा के जीएम महेश मोइती का कहना है कि बिना झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (जेटीडीसी) की इजाजत के रोपवे को कैसे चलाया जा सकता है। इस रोपवे के संचालन से जो कमाई होती है, उसका राजस्व तो झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को भी मिलता है। उनके मुताबिक करार में साफ लिखा है कि 2019 में लाइसेंस खत्म होने के बाद भी कंपनी को पांच साल का दो एक्सटेंशन मिलेगा; और यही वजह है कि कंपनी अभी भी इसका संचालन कर रही थी।

संचालन और मेंटेनेंस नियमों की अनदेखी हुई
साफ है कि पहली नजर में झारखंड सरकार इस हादसे की जिम्मेदारी लेने से बच नहीं सकती। दोनों तरफ की बातें जानने के बाद लगता है कि राज्य के पर्यटन विभाग ने इस रोपवे के संचालन को लेकर कभी चिंता ही नहीं की और एक निजी कंपनी के भरोसे आंख मूंद कर बैठी रही। तथ्यों की छानबीन से लगता है कि इस रोपवे का संचालन इससे जुड़े तमाम जोखिमों को नजरअंदाज करके किया गया। इस रोपवे के संचालन नियमों में रोजाना, छमाही और सालाना मेंटेनेंस की व्यवस्था है। हर तीन महीने पर मॉक रेस्क्यू ऑपरेशन भी किया जाना है। लेकिन, इनसब को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया और इतना बड़ा हादसा हो गया।

त्रिकुट क्षेत्र में दो वर्षों से नहीं है बिजली
हैरानी की बात है कि त्रिकुट क्षेत्र में दो वर्षों से बिजली नहीं है और रोपवे को जेनरेटरों के भरोसा चलाया जा रहा था। अगर तीन महीने में होने वाला रेस्क्यू ड्रिल नियमित तौर पर किया गया होता तो हादसे के बाद उसका फायदा जरूर मिला होता। राहत कार्य में इसलिए भी इतना लंबा वक्त लगा कि घना अंधेरा होने की वजह से रात में ऑपरेशन रोक देना पड़ा और दर्जनों बच्चे-बुजुर्ग और नौजवानों को जिंदगी के लिए दो-दो रातें आसमान में गुजारनी पड़ीं। जानकारी के मुताबिक यही वजह है कि जब जिलाधिकारी हादसे वाले दिन सूर्यास्त के बाद मौके पर पहुंचे तो अंधेरे की वजह से उनका प्रशासनिक अमला लाचार दिखा। यह रोपवे सेवा 2007 में शुरू हुई थी। पहले दो वर्षों तक इसे जेटीडीसी ने चलाया और 2009 के बाद से यह दामोदर इंफ्रा के पास है।

मेंटेंनेंस नहीं हो रहा था तो राज्य सरकार क्या कर रही थी ?
उधर झारखंड के पर्यटन मंत्री हफिजुल हसन ने भी माना है कि मेंटेंनेस की कमी दुर्घटना की वजह हो सकती है। उन्होंने कहा है कि पता चला है कि पुलिया टेढ़ी थी और कई दिनों से जर्जर हालत में चलाई जा रही थी। उनके मुताबिक सवाल है कि एजेंसी ने मेंटेनेंस क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि कई एक्सपर्ट ने कहा है कि तार में टेंशन अपर्याप्त था। वैसे मंगलवार को उन्होंने और जिलाधिकारी ने कहा है कि दामोदर इंफ्रा के पास इसके संचालन का पुख्ता लाइसेंस है।

बीजेपी ने ठहराया हेमंत सोरेन सरकार को जिम्मेदार
उधर विपक्षी बीजेपी ने इस हादसे के लिए राज्य सरकार की अक्षमता को जिम्मेदार ठहराया है, क्योंकि दो वर्षों से मेंटेनेंस का काम नहीं हुआ था। देवघर के पड़ोसी गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर राहत ऑपरेशन के दौरान दुर्घटनास्थल पर कैंप किए हुए थे। उन्होंने कहा है कि हादसे के बाद राज्य के बड़े अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने इसकी जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया है कि 'अगर दामोदर इंफ्रा बिना शर्तों को पूरी किए और बिना एसओपी का पालन किए हुए और बिना सरकार की इजाजत के इसके प्रशासन की नाक के नीचे इसका संचालन कर रहा था, तो दोष किसका है?'

26 अप्रैल को झारखंड हाई कोर्ट में होगी सुनवाई
बहरहाल, झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण की खंडपीठ ने इस हादसे की स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अदालत 26 अप्रैल को इसकी सुनवाई करेगा। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कहा है कि इसके लिए जिम्मेदार को छोड़ा नहीं जाएगा।












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