हेमंत सोरेन के भाई की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए चुनाव आयोग ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

नई दिल्ली, 11 सितंबर। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर विधानसभा सदस्यता रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां चुनाव आयोग की ओर हर कोई देख रहा है कि आयोग हेमंत सोरेन को लेकर क्या फैसला देता है तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने हेमंत सोरेन पर अपनी राय देने की बजाए उनके भाई बसंत सोरेन पर अपनी राय जाहिर की है। गौर करने वाली बात है कि बसंत सोरेन दुमका से विधायक हैं और हेमंत सोरेन के छोटे भाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग ने राजभवन को बसंत सोरने को लेकर अपनी संस्तुति भेज दी है। बसंत सोरेन की बात करें तो वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के मुखिया शिबू सोरेन के सबसे छोटे बेटे हैं।

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    राज्यपाल लेंगे अंतिम फैसला

    राज्यपाल लेंगे अंतिम फैसला

    रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग ने राज्यपाल रमेश बैस को शुक्रवार को इस बाबत अपनी रिपोर्ट भेजी है। चुनाव आयोग ने बसंत सोने की विधानसभा सदस्यता को जनप्रतिनिधि एक्ट 1951 की धारा 9ए के तहत अपनी राय राज्यपाल को भेजी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोग ने 29 अगस्त को सोरेन की खनन लीज केस के चलते सदस्यता रद्द करने की अपनी सुनवाई पूरी कर ली है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग की रिपोर्ट के बाद अब राज्यपाल इसपर अपना अंतिम फैसला लेंगे।

    बसंत सोरेन आए थे विवादों में

    बसंत सोरेन आए थे विवादों में

    बता दें कि बसंत सोरेन ने हाल ही में एक विवादित बयान दिया था जिसकी वजह से वह सुर्खियों में आ गए थे। सोरेन ने कहा था कि मैं दिल्ली अपने अंडरगारमेंट खरीदने के लिए गया था। उन्होंने कहा था, मेरे अंडरगारमेंट खत्म हो गए हैं, इसलिए मैं दिल्ली अंडरगारमेंट खरीदने के लिए गया था। राजनीतिक संकट सामान्य चीज है, यह सब चलता रहता है। गौर करने वाली बात है कि यूपीए गठबंधन के विधायकों को खूंटी और इसके बाद राजपुर रिजॉर्ट में रखा गया था। इसमे बसंद भी शामिल थे। आरोप था कि भाजपा प्रदेश में सियासी संकट के बीच इन विधायकों को अपने खेमे में मिलाने की कोशिश कर रही है।

    क्या है मामला

    क्या है मामला

    झारखंड की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई थी जब इस तरह की रिपोर्ट सामने आई थी कि 2019 में जब खनन मंत्रालय मुख्यमंत्री सोरेन के पास था तो उन्होंने अपने करीबियों को खनन की लीज दी थी, इसी आधार पर उनकी विधानसभा सदस्यता को रद्द करने की सिफारिश चुनाव आयोग से की गई है। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है और यूपीए की सरकार गिर सकती है।

     राज्यपाल ने साधी चुप्पी

    राज्यपाल ने साधी चुप्पी

    किसी भी तरह की विधायकों की खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए यूपीए ने अपने विधायकों को छत्तीसगढ़ के एक रिजॉर्ट में ठहराया था। जिसके बाद सोरेन सरकार ने सदन में अपना बहुमत 48 विधायकों के समर्थन के साथ साबित किया। लेकिन भाजपा ने इस दौरान सदन से वॉकआउट कर दिया था। वहीं इन सब के बीच में राज्यपाल ने चुप्पी साध रखी है, उन्होंने हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता को रद्द करने को लेकर कोई भी बयान नहीं दिया है।

    जेएमएम ने साबित किया बहुमत

    जेएमएम ने साबित किया बहुमत

    भारतीय जनता पार्टी ने पहले हेमंत सोरेन और उनके भाई की विधानसभा सदस्यता को रद्द करने की मांग की थी। भाजपा ने आरोप लगाया कि उनके पास एक खनन कंपनी में सह मालिकाना हक है, इस बात की जानकारी उन्होंने चुनावी शपथ पत्र में नहीं दी थी, लिहाजा जनप्रतिनिधि एक्ट के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता को रद्द किया जाए। बता दें कि यूपी के पास प्रदेश में 81 में से 49 विधायकों का समर्थन है।

    नंबर गेम

    नंबर गेम

    जबकि पार्टी को बहुमत के लिए 41 विधायकों की ही दरकार है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 30 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 18 विधायक। गौर करने वाली बात है कि कांग्रेस के तीन विधायकों को भारी मात्रा में नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया था। यूपीए के पास एक राजद के विधायक का भी समर्थन है। वहीं भाजपा की बात करें को उसके पास प्रदेश में 26 विधायक हैं, जबकि ऑल झारखंड स्टू़डेंट यूनिन के 2 और अन्य 2 विधायकों का समर्थन भी भाजपा के पास है।

    खबरें लीक हो रही!

    खबरें लीक हो रही!

    झारखंड प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राठौर ने कहा कि झारखंड से पिछले कुछ दिनों से इस तरह की रिपोर्ट सामने आ रही हैं कि चुनाव आयोग ने यह प्रस्ताव दिया है, चुनाव आयोग ने वह सुझाव दिया है, लेकिन ये रिपोर्ट आ कहां से रही हैं, इसका पता अभी तक नहीं लग पाया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के भी कई नेताओं ने इस तरह के आरोप लगाए हैं कि गवर्नर हाउस से खबरें लीक की जा रही हैं।

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