पांच साल पहले झारखंड से लापता हुई आदिवासी लड़की, आधार कार्ड की बदौलत मिली वापस, जानिए पूरी कहानी

पांच साल पहले झारखंड से लापता हुई आदिवासी लड़की, आधार कार्ड की बदौलत मिली वापस, जानिए पूरी कहानी

Jharkhand Tribal girl returned home due to Aadhar card: आदिवासी क्षेत्रों में अभी भी लोग गरीबी और भुखमरी का शिकार हैं। जिसकी वजह से चार पैसों की लालच में आकर वो लोग अनजान लोगों पर भरोसा करके अपने बच्‍चों को उन्‍हें नौकरी के लालच में सौंप देते हैं। इसमें बड़ी संख्‍या में लड़कियां भी खतरनाक हाथों में चली जाती हैं। झारखंड के आदिवासी परिवार की रश्मिनी की भी कहानी ऐसी ही है। हालांकि कि वो भाग्यशाली निकली और अब वो पांच साल बाद आधार कार्ड की बदौलत अपने परिवार से मिली और अब घर वापस लौट रही है।

गरीबी से तंग पिता ने अनजान शख्‍स पर कर लिया था भरोसा

गरीबी से तंग पिता ने अनजान शख्‍स पर कर लिया था भरोसा

दरअसल, झारखंड के पश्चिम सिंहभुम शहर के आदिवासी परिवार की इस लड़की को उसके पिता ने एक एजेंट के साथ दिल्‍ली में नौकरी करने के लिए भेजा था। उसे लालच था कि उसकी बेटी की नौकरी से उसे चार पैसें मिलेगी और गरीबी से जूझ रहे अपने परिवार को मदद होगी।

एजेंट पर शक होने पर जान बचाकर भागी थी रश्मिनी

एजेंट पर शक होने पर जान बचाकर भागी थी रश्मिनी

23 साल की रश्मिनी ने बताया कि वो जब एजेंट के साथ ट्रेन में सवार होकर दिल्‍ली के लिए निकली तो उसका व्‍यवहार कुछ सही नहीं लगा और उसे अपने लिए खतरा महसूस हुआ। जिसके बाद वो फतेहपुर रेलवे स्‍टेशन पर वो उतर गई।

पुलिस ने सेल्‍टर होम भेज दिया था

पुलिस ने सेल्‍टर होम भेज दिया था

रेलवे स्‍टेशन पर रेलवे पुलिस को वो मिली और उसे सेल्‍टर होम में रखा गया। लंबे समय तक परिवार की तलाश की गई जब उसका परिवार नहीं मिला तो उसे इलाहाबाद के सेल्‍टर होम में भेज दिया गया। जहां उसका नाम राशि दर्ज करवाया गया।

लखनऊ के महिला पुर्नवास केंद्र में भेज दिया गया

लखनऊ के महिला पुर्नवास केंद्र में भेज दिया गया

अगस्‍त 2022 में उसे लखनऊ के महिला पुर्नवास केंद्र में भेज दिया गया। यहां की अधीक्षिका ने बताया के उसका आधार बनवाने के लिए हमनें पांच बार प्रयास किया लेकिन टेक्निकल एरर के कारण उसका आधार कार्ड नहीं बना।

 ऐसे आधार कार्ड डेटा से मिला घर का सही पता

ऐसे आधार कार्ड डेटा से मिला घर का सही पता

अधीक्षिका आरती सिंह ने बताया लेकिन छठीं बार में जब प्रयास किया गया तो आधार डेटा में डूप्‍लीकेट शो किया जिसके आधार पर उसके ओरिजन घर का पता मिल गया और अब उसे पांच साल बाद उसके परिवार के पास भेजा जा रहा है।

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