झारखंड: राज्यपाल ने बांग्लादेशी घुसपैठ पर जताई चिंता, कहा- बदल जाएगी आदिवासियों की जीवनशैली
झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब प्रदेश के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने इस मुद्दे को उठाया है। साथ ही लगातार हो रही घुसपैठ पर चिंता जताई। उन्होंने साफतौर पर कहा कि अगर इसको नहीं रोका गया, तो ये भविष्य में आदिवासियों को प्रभावित करेगा।
रांची में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये बहुत खतरनाक है क्योंकि विदेशियों की घुसपैठ से आदिवासी लोगों की पूरी जीवनशैली बदल जाएगी। खासकर जब वे आकर आदिवासी महिलाओं से शादी कर रहे हैं तो ये चिंताजनक है। हमें इसे लेकर बहुत सतर्क रहना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि मैंने इस मुद्दे को सीएम के साथ-साथ मुख्य सचिव के सामने भी उठाया है। विदेशियों की घुसपैठ से आदिवासी परंपरा नहीं बदलनी चाहिए और झारखंड की जनसांख्यिकी नहीं बदलनी चाहिए। हमें इस बारे में बहुत सावधान रहना चाहिए।
हाईकोर्ट भी पूछ चुका है सवाल
इससे पहले इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए राज्य और केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। साथ ही पूछा कि झारखंड में कैसे बांग्लादेशी घुसपैठिए पहुंच जा रहे हैं? दोनों सरकारों को इसकी जानकारी है या नहीं। अगर जानकारी है, तो उनको रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
वहीं याचिकाकर्ता डेनियल दानिश ने कोर्ट को बताया था कि जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज समेत कई इलाकों में घुसपैठ जारी है। वहां पर बांग्लादेशी आकर बस रहे, जिससे स्थानीय लोग प्रभावित हो रहे हैं।
सिर्फ 40 किमी दूर है सीमा
आपको बता दें कि झारखंड के अंतिम छोर से बांग्लादेश की सीमा सिर्फ 40 किमी दूर है। ऐसे में बांग्लादेशी घुसपैठिए बंगाल के रास्ते वहां पर पहुंच रहे। उनका टारगेट फरक्का, उढ़ावा, पीयारपुर, बेगमगंज, फूकदकीपुर, दियारा, चांदशहर और प्राणपुर रहते हैं।
बीजेपी ने भी उठाए सवाल
बीजेपी भी घुसपैठ को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साध चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने तो यहां तक कह दिया था कि ये घुसपैठिए एटम बम से भी ज्यादा खतरनाक हैं।












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