गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने वाली विवाहित महिला नहीं कह सकती कि रेप हुआ.., झारखंड HC का फैसला
झारखंड उच्च न्यायालय ने एक विवाहित वयस्क महिला द्वारा दायर बलात्कार के मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह किसी गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने के संभावित परिणामों से पूरी तरह वाकिफ थी।
झारखंड उच्च न्यायालय ने अपने फैसला में कहा कि आरोपी को किसी भी तरह से झूठ बोलकर या बहाने बनाकार सहमति प्राप्त करने वाला नहीं माना जा सकता है। कथित शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के महिला के आरोपों को कोर्ट ने खारिज कर दिया।

दरअसल सेशन कोर्ट के एक रेप केस के फैसले को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसे लालच देकर रोमांटिक रिश्ते में फंसाया और उसके साथ शीरीरिक संबंध बनाए। महिला ने पुरुष पर रेप का आरोप लगाया था।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस चंद ने अपने फैसले में कहा, प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि पीड़िता का अभियुक्त अभिषेक कुमार पाल के साथ प्राथमिकी दर्ज करने के दिन से साढ़े तीन साल पहले से प्रेम संबंध था। यह एफआईआर 14.03.2021 को दर्ज की गई थी, इसलिए एफआईआर में लगाए गए आरोपों के मद्देनजर साढ़े तीन साल पहले की अवधि के दौरान पीड़िता 20 साल की थी। आरोपी के साथ कॉलेज के समय से प्रेम संबंध में हैं।
कोर्ट ने कहा कि, आरोपी के प्रेम संबंधों के दौरान पीड़िता बालिग थी, जबकि आरोपी नाबालिग था। उस समय वह पीड़िता से 2 साल छोटा था। पीड़िता ने 2018 में शादी कर ली थी। न्यायालय के जरिए इसे खत्म किए बिना उसने आरोपी अभिषेक कुमार पाल से शारीरिक संबंध बनाए। विक्टिम बड़ी थी और शादीशुदा थी। बालिग और समझदार होने के बावजूद उसने आरोपी अभिषेक कुमार पाल के साथ विवाह के प्रलोभन पर शारीरिक संबंध बनाये।
कोर्ट ने कहा कि, वह दूसरे शख्स से शारीरिक संबंध के दुष्परिणाम जानती थी। इसके अलावा 2018 में उसकी शादी हो चुकी थी।' कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता यह नहीं कह सकती कि झूठा वादा करके उसका यौन शोषण किया। इसलिए, एफआईआर में लगाए गए आरोपों से यह माना जाता है कि उसे आरोपी द्वारा धोखा दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में दी गई शिकायत और जांच अधिकारी की ओर से एकत्रित सबूत इस बात के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि आरोपी पर रेप का केस चलाया जाए।












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