Maiyan Samman Yojana के खिलाफ झारखंड HC ने खारिज की जनहित याचिका, इस आधार पर ठुकराया
झारखंड हाई कोर्ट ने मैय्या सम्मान योजना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) को गुरुवार को खारिज कर दिया है। हेमंत सोरेन सरकार की ओर से शुरू की गई यह योजना महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। न्यायालय का यह फैसला मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति दीपक रौशन की खंडपीठ ने सुनाया।
जनहित याचिका दायर करने वाले विष्णु साहू ने तर्क दिया था कि यह योजना विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए राजनीति से प्रेरित थी। हालांकि, न्यायमूर्ति राव ने स्पष्ट किया कि न्यायालय महिलाओं को वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से नीतिगत निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

इस योजना ने शुरू में 21 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को लक्षित किया था, लेकिन बाद में 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को भी इसमें शामिल कर लिया गया।
महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता
इस पहल के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने सीधे उनके बैंक खातों में 1,000 रुपये मिलते हैं। इसके लिए पात्र होने के लिए उनके बैंक खातों को आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए। इसके अलावा, इस योजना का लाभ केवल न्यूनतम आयकर सीमा से बाहर के परिवारों की महिलाओं को ही मिल सकता है।
अक्टूबर में झारखंड सरकार ने मासिक भुगतान को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये करने का फैसला किया। हालांकि, इसका लाभ दिसबंर से मिलने की बात कही गई है। अगस्त से 18 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 50 लाख महिलाओं को ये भुगतान मिल रहे हैं।
साहू ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पर चुनाव में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए इस योजना का राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यह योजना सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए बनाई गई थी।
झारखंड हाई कोर्ट की ओर से यह फैसला ऐसे समय में सुनाया गया है, जब राज्य में पहले चरण की 43 सीटों पर चुनाव हो भी चुके हैं और 81 में से बाकी बची सीटों पर 20 नवंबर को वोटिंग होना है। चुनाव नतीजे 23 नवंबर को आएंगे।












Click it and Unblock the Notifications