Jharkhand Chunav: एक-एक बूथ पर अभी से कैसे सक्रिय हुई BJP? हरियाणा वाली रणनीति पर चल रहा काम!
Jharkhand Chunav 2024: बीजेपी ने झारखंड विधानसभा चुनावों के सिलसिले में राजधानी रांची में एक वॉर रूम बनाया है। यहां से पार्टी के लोग राज्य की सभी 14 लोकसभा सीटों की 81 विधानसभा सीटों के दायरे में आने वाले 29,562 पोलिंग बूथों से पल-पल की सूचनाएं जुटा रहे हैं। हरियाणा में पार्टी की यह रणनीति काफी कारगर हुई थी। क्योंकि, जमीनी स्तर पर रियल-टाइम में क्या माहौल है, उस हिसाब से पार्टी को अपनी रणनीति दुरुस्त करना आसान हो जाता है।
केंद्रीय कृषि मंत्री और झारखंड में भाजपा के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को रांची के मोहन कॉम्पलेक्स में पार्टी के इस चुनावी वॉर रूम का औपचारिक उद्घाटन किया है। वैसे इसने अनौपचारिक तौर पर 15 अक्टूबर से ही काम करना शुरू कर दिया था।

हरियाणा की तरह रांची में भी सक्रिय हुआ बीजेपी का वॉर रूम
बीजेपी नेता रोहन गुप्ता ने अंग्रेजी अखबार ईटी को जानकारी दी है कि 'हरियाणा चुनाव में भी हमारा इसी तरह का वॉर रूम था और अब यह झारखंड में भी काम करने लगा है।' गुप्ता कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं और अब पार्टी के मीडिया टीम में अपनी जिम्मादारी निभा रहे हैं।
हर बूथ के कम से कम तीन कार्यकर्ताओं से संपर्क
बीजेपी के इस वॉर रूम में करीब 80 से 90 लोग सुबह साढ़े नौ बजे से रात के साढ़े नौ बजे तक लगातार काम कर रहे हैं। पार्टी के इन कार्यकर्ताओं को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गुप्ता के मुताबिक, 'इसकी शुरुआत बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग के साथ हुई है। राज्य में 29,562 पोलिंग बूथ हैं और हम प्रत्येक बूथ के कम से कम तीन पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जुड़े हुए हैं।'
मतदाताओं से सीधे संपर्क के लिए बूथ-स्तर के कार्यकर्ता सक्रिय
शुरुआती ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह अपने बूथ के मतदाताओं के घरों में जाएं और रोजाना पार्टी के 'सरल' ऐप पर अपनी रिपोर्ट भेजें। वॉर रूम में काम करने वाले पार्टी के लोगों की जिम्मेदारी है कि वह बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाए रखें, क्योंकि मतदान के दिन उन्हीं की मेहनत पार्टी के काम आने वाली है।
पार्टी नेता ने बताया, 'हरियाणा में इससे पार्टी को बहुत फायदा मिला। हमारे कार्यकर्ता ही हमारी ताकत हैं और जब पार्टी के नेता चुनाव अभियान को संचालित कर रहे हैं, हमारी जिम्मेदारी जमीनी-स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की है।'
वॉर रूम तक पहुंच रहा है रियल-टाइम रिस्पॉन्स
पार्टी के बूथ-स्तर के कार्यकर्ता अपने बूथ से जो फीडबैक भेजते रहते हैं, उसे आखिरकार रिपोर्ट की शक्ल में पार्टी नेताओं को उपलब्ध करवाई जाती है। पार्टी बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं के हर दिन की परफॉर्मेंस का पूरा रिकॉर्ड रखती है। जैसे, वह कितने घरों में संपर्क करने में सफल रहे हैं, लोगों का रिस्पॉन्स कैसा मिल रहा है?
पीएम मोदी के मंत्र के आधार पर काम कर रही है पार्टी
'मेरा बूथ, सबसे मजबूत' भाजपा के बूथ-स्तरीय कार्यकर्ताओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मूल मंत्र रहा है। भाजपा को वैचारिक ताकत देने वाला आरएसएस, जमीनी स्तर के संगठन के लिए ही अपनी अलग पहचान रखता है।
बीजेपी में इस तरह की परंपरा संघ से विकसित हुई है और कई बार जमीनी स्तर पर मतदाताओं को बूथों तक पहुंचने में प्रेरित करने में बीजेपी के बूथ-स्तरीय कार्यकर्ताओं और संघ के स्वयंसेवकों के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
लेकिन, तथ्य यही है भारतीय जनता पार्टी की यही ताकत है। जब वह बूथ-स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं का जोश ऊंचा रख पाने में नाकाम रहती है तो फिर उसे मनचाही कामयाबी मिलनी मुश्किल होती है।
इस साल के लोकसभा चुनावों में पार्टी इसी प्वाइंट पर पिछड़ चुकी है, लेकिन हरियाणा विधानसभा और जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र के विधानसभा चुनावों में वह अपनी इस रणनीति को फिर से मजबूत धार देने में कामयाब रही है।












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