झारखंड बीजेपी अध्यक्ष बाबू लाल मरांडी ने सीएम पर साधा निशाना, कहा-'युवाओं के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा'
Jharkhand Assembly Election 2024: झारखंड में वर्तमान समय में राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। हाल ही में भाजपा की परिवर्तन सभा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी सहित कई प्रमुख नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सरकार पर युवाओं, बुजुर्गों और अन्य समुदायों के प्रति विफल होने का आरोप लगाया।
इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया की रांची यात्रा ने राज्य में भाजपा की उपस्थिति को और मजबूती देने की कोशिशों को उजागर किया। इस यात्रा में बाबूलाल मरांडी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मंडाविया का स्वागत किया। जो आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा के सक्रिय राजनीतिक कार्यक्रमों का संकेत है।

झारखंड भाजपा के अध्यक्ष बाबू लाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि मुझ पर जितने मुकदमे दर्ज कराने हैं। करा दीजिए। लेकिन याद रखिएगा कि मैं झारखंड के युवाओं के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा।
राजनीतिक हलचल के बीच सांसद ढुल्लू मेहता ने जमशेदपुर में वैश्य समुदाय के एक कार्यक्रम में जमशेदपुर पूर्व के विधायक सरयू राय के खिलाफ खुलकर असहमति जताई और आगामी चुनावों में उन्हें चुनौती देने का संकल्प लिया। इस बीच सर जेसी बोस विश्वविद्यालय और इंजीनियरिंग कॉलेज की आधारशिला रखी गई। जिसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र में भी अशांति देखी जा रही है। बोकारो स्टील के प्रभारी निदेशक वीरेंद्र कुमार तिवारी ने वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 200 करोड़ रुपए के नुकसान की घोषणा की। इसका कारण गिरती स्टील की कीमतें और आयात से बढ़ती प्रतिस्पर्धा बताया गया। हालांकि अगले छह महीनों में सुधार की उम्मीद जताई गई है।
राजनीतिक मोर्चे पर झारखंड कांग्रेस प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने संकेत दिया कि कांग्रेस के अधिक सीटें जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद का रोटेशन संभव हो सकता है। इस प्रस्ताव ने गठबंधन के भीतर बहस को जन्म दिया है। जिससे चुनाव-पूर्व रणनीति और अधिक जटिल हो गई है।
इस बीच, JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं के चलते विवाद खड़ा हो गया। जिसके कारण विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा रद्द करने की मांग उठी। हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आश्वासन ने प्रदर्शनकारियों को कुछ हद तक शांत किया। लेकिन पेंशन प्रणाली और मृतक कर्मचारियों के आश्रितों के लिए नौकरी की मांग से जुड़े मुद्दे अभी भी सरकार के खिलाफ असंतोष को बढ़ावा दे रहे हैं।
इन घटनाओं ने झारखंड के राजनीतिक और औद्योगिक परिदृश्य की जटिल स्थिति को उजागर किया है। भाजपा हेमंत सोरेन सरकार पर आलोचना को तेज करते हुए चुनावी तैयारियों में जुटी है। जबकि औद्योगिक क्षेत्र के संघर्ष व्यापक आर्थिक चुनौतियों की ओर संकेत कर रहे हैं। जैसे-जैसे राज्य आगामी चुनावों की ओर बढ़ रहा है। इन घटनाओं के परिणाम झारखंड के भविष्य की दिशा तय करेंगे।












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