झारखंड में रिस्क नहीं लेना चाहता UPA गठबंधन, छत्तीसगढ़ शिफ्ट होंगे विधायक
रांची, 27 अगस्त: बिहार के बाद अब उसके पड़ोसी राज्य झारखंड में राजनीतिक संकट गहरा गया है, जहां पर राज्यपाल किसी भी वक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी से जुड़ा फैसला ले सकते हैं। विधायकी जाने पर उनको सीएम पद से भी इस्तीफा देना पड़ेगा। ऐसे में रांची स्थित सीएम आवास से विधायकों का मैनेजमेंट चल रहा है, ताकि बीजेपी वहां पर सेंधमारी ना कर सके। इसके अलावा नए सीएम के नाम पर भी मंत्रण चल रही है।
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दरअसल सीएम सोरेन की सदस्यता को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी राय राज्यपाल को दे दी है। ऐसे में राज्यपाल शनिवार को उस रिपोर्ट पर अपना अनुमोदन देंगे। अगर लाभ के पद मामले में सीएम दोषी करार दिए गए, तो उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाएगी, लेकिन ये तब मान्य होगा जब चुनाव आयोग इसे नोटिफाई करते हुए इसकी एक प्रति राज्य चुनाव आयोग भेज को दे। वहीं विधानसभा अध्यक्ष का भी दफ्तर शनिवार और रविवार को बंद रहेगा। ऐसे में अभी सीएम सोरेन के पास कुछ वक्त है। इस वजह से वो विधायकों के मैनेजमेंट में लगे हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक यूपीए गठबंधन चाहता है कि सीएम के इस्तीफे के बाद उथल-पुथल ना मचे, इस वजह से वो अपने विधायकों को छत्तीसगढ़ शिफ्ट कर रहे हैं। वहां पर कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में वहां खतरा कम है। जब नए सीएम का चुनाव हो जाएगा, तो उन्हें फिर से वापस बुला लिया जाएगा।
कल्पना का नाम सबसे आगे
खबर ये भी है कि हेमंत सोरेन की पत्नी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के चीफ शिबू सोरेन की बहू राजनीति से दूर रहती हैं और वो बहुत ज्यादा मीडिया के सामने नहीं आतीं। वो खुद का एक स्कूल चलाती हैं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी काम करती हैं, लेकिन अभी पार्टी और सरकार से जुड़े लोग इस बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।












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