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Fish Farming: कोयला खादान में किया मछली पालन का अनोखा प्रयोग, लाखों में हो रही कमाई

Fish Farming: शशिकांत का मछली पालन मॉडल एसकोओसीएच अवार्ड के लिए भी नॉमिनेट भी किया गया, प्रधानमंत्री अवार्ड के आखिर तक भी पहुंचा। धीरे-धीरे शशिकांत मछली पालन की दुनिया में जाना पहचाना नाम बन गए। आज की तारीख में वह...

Fish Farming: मछली पालने के व्यवसाय में काफी मुनाफा है, अगर किसी को लगता है कि मछली पालन में मुनाफा नहीं तो उन्हें एमबीए मछली वाल और किसान शशिकांत से बिजनेस टिप्स ज़रूर लेने चाहिए, क्योंकि यह लोगो ना सिर्फ लाखों में कमा रहे हैं, बल्कि लोगों को रोज़गार भी दे रहे हैं। शशिकांत झारखंड के रामगढ़ में रहने वाले हैं, उन्होंने आज से करीब 12 साल पहले एक अनोखा प्रयोग किया था और आज लाखों रुपये हर महीने कमा रहे हैं। उन्होंने झारखंड की एक बंद पड़ी खादान में मछली पालन का अनोखा प्रयोग किया और कामयाब भी हुए। आइए विस्तार से जानते हैं उनकी कामयाबी की कहानी ।

मछली पालन का अनोखा प्रयोग

मछली पालन का अनोखा प्रयोग

कोयला निकालने के बाद अकसर खादान को खाली छोड़ दिया जाता है, झारखंड में आज भी कई खादान खाली पड़े हुए हैं। खाली पड़े खादानों में दिन गुज़रते पानी भी भरने लगता है, यह तो हर कोई जानता है। शशिकांत का भी ध्यान इस ओर गया तो उन्होंने सोचा क्यो ना इसका कुछ इस्तेमाल किया जाए। बस फिर उन्हे मछली पालन की तरकीब सूझी। बंद पड़ी एक खादान में मछली पालन के लिए शशिकांत ने सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड एनओसी (अनपत्ति प्रमाण पत्र) लिया और फिर मछली पालन शुरू किया ।

साल 2010 में शशिकांत की मेहनत रंग लाई

साल 2010 में शशिकांत की मेहनत रंग लाई

कोयला खादान में मछली पालन के लिए पहले उन्होंने आरा गांव (मांडू प्रखंड) के पढे लिखे युवाओं की एक टीम बनाई। इसके बाद मत्स्य विभाग से संपर्क कर बंद पड़ी खादान में मछली पालन की बात बताई और विभाग से मदद भी ली। सीसीएल से एनओसी मिलने के बाद शशिकांत ने मछली पालने का काम शुरू किया। साल 2010 में उनकी मेहनत रंग लाई। विभिन्न जगहों पर उनकी हौसला अफजाई की गई और मंचों पर मछली पालन के सम्मानित भी किया गया।

स्थानीय लोगों को दे रहे रोज़गार

स्थानीय लोगों को दे रहे रोज़गार

शशिकांत का मछली पालन मॉडल एसकोओसीएच अवार्ड के लिए भी नॉमिनेट भी किया गया, प्रधानमंत्री अवार्ड के आखिर तक भी पहुंचा। धीरे-धीरे शशिकांत मछली पालन की दुनिया में जाना पहचाना नाम बन गए। आज की तारीख में वह प्रति दिन करीब 45 किलो मछलियों का सप्लाई करते हैं। मछली पालन से लाखों रुपये की कमाई के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार भी दे रहे हैं। इलाके के लोगों को वह स्वरोज़गार के लिए जागरुक भी कर रहे हैं।

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