झारखंड: यहां मां गर्म सलाखों से दगवाती हैं अपने बच्चों के पेट, कई नवजातों की चली जाती है जान

पूर्वी सिंहभूम। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास का मामला सामने आया है, जहां मां अपने नवजात बच्चे को गोद में लेकर गर्म लोहे के सलाखों से उसका पेट दगवाती है। ऐसा स्थानीय लोग मानते हैं कि बच्चे का दगा पेट उसकी पेट की बीमारियों को दूर करेगा। बता दें कि यह परंपरा काफी लंबे समय से चली आ रही है। कई बार इस अंधविश्वास के चलते बच्चों की जान भी चली जाती है।

east singhbhum superstition newborn up to five years burnt

फिर भी झारखंड सरकार इस परंपरा पर रोक नहीं लगा पाई। कोल्हान थाना क्षेत्र के पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण इलाकों में ऐसे दर्दनाक दृश्य देखने को मिले। सरकार के सारे प्रयास कभी-कभार आदिवासियों के गांवों में निकाली जाने वाली जागरूकता रैलियों तक सीमित हैं। परंपरा को आस्था का विषय बताकर अधिकारी इससे ज्यादा कुछ नहीं करते। छोटे-छोटे बच्चों को इस परंपरा के नाम पर कितनी दर्दनाक पीड़ा से गुजरना पड़ता है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

मकर संक्रांति के दूसरे दिन आदिवासी बहुल इलाके में ओझा अलाव जलाते हैं, उसमें चार मुंह वाले सलाख को आग पर तपाते हैं। वहीं एक खाट बिछी होती है, जिसपर बच्चे को लाकर लिटाया जाता है। उसके हाथ-पैर जकड़ दिये जाते हैं। जाड़े के मौसम में बच्चे के शरीर से कपड़े उतार दिये जाते हैं। कपड़े हटने के बाद बच्चे की नाभि के आसपास चार जगहों पर सरसों का तेल लगा कर उसमें गर्म सलाखों से दाग लगाए जाते हैं।

इस दौरान पूरा गांव बच्चों की चीत्कार से गूंजता रहता है। बच्चा जोर-जोर से रोता है लेकिन परिवार के सदस्य उसे इतनी जोर से पकड़कर रखते हैं कि वह तड़प भी नहीं पाता है। फिर दागने के बाद दाग वाले स्थान पर फिर से सरसों तेल लगा दिया जाता है।

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