'कांग्रेस को तय करना है कि वो लोकतंत्र के साथ हैं या पीएम मोदी के': अध्यादेश विवाद पर बोले सीएम केजरीवाल
केंद्र सरकार के अध्यादेश को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल देश के सभी विपक्षी दलों से मुलाकात कर रहे हैं। साथ ही इस अध्यादेश के खिलाफ समर्थन मांग रहे हैं।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ देश के विपक्षी नेताओं से समर्थन के लिए मांग कर रहे हैं। इसके चलते उन्होंने आज झारखंड के सीएम और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के रांची स्थित आवास पर मुलाकात की। साथ ही उन्होंने कांग्रेस को लेकर कहा कि कांग्रेस को तय करना है कि वो लोकतंत्र के साथ है या फिर पीएम मोदी के।
दिल्ली के सीएम और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ पंजाब सीएम भगवंत मान और अन्य AAP नेताओं रांची स्थित झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के आवास पर पहुंचे। जहां उन्होंने केंद्र के अध्यादेश को लेकर चर्चा की। साथ ही झारखंड के मुख्यमंत्री से इस अध्यादेश के खिलाफ समर्थन मांगा।
दिल्ली सरकार के खिलाफ केंद्र के अध्यादेश को लेकर रांची में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की। मुलाकात के बाद दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये अध्यादेश मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा। बीजेपी के पास लोकसभा में बहुमत हैं लेकिन राज्यसभा में नहीं। इसलिए अगर सभी गैर-बीजेपी दल एकजुट हो जाएं, तो इस अध्यादेश को हराया जा सकता है। ये केवल दिल्ली के बारे में नहीं है, बल्कि देश के संघीय सिद्धांतों के बारे में है। मोदी सरकार संविधान के साथ छेडछाड़ कर रही है।
पिछले महीने दिल्ली की जनता के साथ घोर अन्याय हुआ। उनका अपमान किया गया और उनके लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए। 11 मई को एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट ने आदेश दिया था कि दिल्ली की जनता द्वारा चुनी गई सरकार के पास शक्तियां होंगी। लेकिन दुर्भाग्य से 19 मई को सरकार ने अध्यादेश लाकर आदेश को दरकिनार कर दिया। मोदी सरकार ने कहा कि वे चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने देंगे।'
सीएम केजरीवाल ने कांग्रेस के रुख को लेकर सवाल को लेकर जवाब दिया कि आज कांग्रेस को तय करना है कि वो लोकतंत्र के साथ है, देश के 140 करोड़ लोगों के साथ है या मोदी जी के साथ है।
वहीं, इस मामले पर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि ये अध्यादेश देश की संघीय व्यवस्था के साथ साथ विविधता में एकता के विचार पर भी हमला है। केंद्र सरकार संघीय ढांचे की बात करती है लेकिन, इसके बिल्कुल विपरीत काम करती है। आज ये स्पष्ट हो गया है कि जो दल भाजपा के सहयोगी नहीं हैं वे लगभग सामना कर रहे हैं। ये सिर्फ सरकार पर नहीं बल्कि लोगों पर भी हमला है। हम पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से इस अध्यादेश के खिलाफ कैसे आगे बढ़ना है।
वहीं, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ देश के विपक्षी नेताओं से समर्थन के लिए मांग कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने ममता बनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, तेलंगाना सीएम केसीआर से मुलाकात की है। वहीं, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से भी मुलाकात का समय मांगा है।
आखिर क्या है ये अध्यादेश?
11 मई को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को कार्यरत आईएएस अधिकारियों के स्थानांतरण करने की शक्ति दे दी। इसके बाद आप पार्टी ने एक्शन लेते हुए सेवा सचिव आशीष मोरे का तबादला कर दिया। मोरे ने एलजी से शिकायत कर आरोप लगाया कि उनका तबादला मंत्री सौरभ भारद्वाज के निजी प्रतिशोध का नतीजा है। इसके बाद बाद 19 मई को केंद्र सरकार ने एलजी को विशेष अधिकार देने और दिल्ली के अदिकारियों के लिए एक अलग सेवा आयोग बनाने के लिए एक अध्यादेश पारित किया। जिसे आम आदमी पार्टी असंवैधानिक बता रही है। वहीं, बीजेपी नेता इस अध्यादेश को दिल्ली की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी बता रही है।












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