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Jharkhand Elections: प्रत्याशियों के चयन के लिए BJP करवा रही है सर्वे, कई दिग्गजों की बदली जा सकती हैं सीटें

BJP's Strategic Surveys for Jharkhand Candidates, झारखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई हैं। हाल ही में जेएमएम छोड़ बीजेपी में शामिल हुए चंपई सोरेन के बाद पार्टी अब टिकटों के बंटवारों को लेकर माथापच्ची में जुटी हुई है।

बीजेपी अब टिकटों के बंटवारों पर फोकस कर रही है। वह ऐसे उम्मीदवारों का चयन कर रही है। जो पार्टी को जीत दिला सकें। इस लेकर रविवार को भाजपा चुनाव समिति की पहली बैठक भी हुई है। बैठक में चुनाव के संचालन व प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गयी।

BJP Conducts Surveys for Candidate Selection in Jharkhand Elections

हर सीट का सर्वे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की ओर से चार स्वतंत्र एजेंसियों ने पूरे राज्य में विधानसभा सीटों पर व्यापक सर्वेक्षण के लिए नियुक्त किया गया है। जो हर विधानसभा सीट की रिपोर्ट आलाकमान को सौंपेगी। जो पार्टी उम्मीदवारों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विभिन्न चार सर्वेक्षणों के निष्कर्ष आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों का नाम तय करने का मजबूत आधार बनेगा। इस प्रक्रिया से उम्मीदवारों का चयन अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगा। नेतृत्व की चिंता राज्य में दल के अग्रिम कतार के नेताओं को लेकर भी है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सीनियर लीडर जनता से जुड़े रहें और उनकी समस्याओं को समझें। इससे पार्टी की छवि मजबूत होगी और जनता का विश्वास बढ़ेगा।

इसको ऐसे भी समझा जा सकता है कि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी पिछला बार गिरिडीह के धनवार सीट से जीते थे। यह सामान्य सीट है। पार्टी इस सीट पर किसी अन्य मजबूत कैंडिडेट को उतारना चाह रही है। ताकि सामान्य सीट का सही उपयोग किया जा सके। वही बाबूलाल मरांडी के लिए किसी ऐसी आदिवासी सुरक्षित सीट खोजी जा रही है। जहां से उनकी जीत सुनिश्चित की जा सके।

ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा भी इस बार चुनाव लड़ सकते हैं। अर्जुन मुंडा की पारंपरिक खरसावां विधानसभा सीट फिलहाल झारखंड मुक्ति मोर्चा के कब्जे में है। वे यहां से चुनाव लड़ सकते हैं या किसी अन्य सीट पर भी उतारा जा सकता है। भाजपा की कोर कमेटी इस पर लगातार विचार-विमर्श कर रही है।

उम्मीदवारों के चयन में जिला कमेटियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जिला कमेटियों से प्रत्याशियों के नामों का पैनल मांगा गया है ताकि सही उम्मीदवारों का चयन हो सके।
भाजपा की कोर कमेटी की बैठकों में इस मुद्दे पर लगातार चर्चा हो रही है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी संभावित उम्मीदवारों पर विचार किया जाए और सबसे उपयुक्त व्यक्ति को टिकट दिया जाए।

भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी सक्रियता बढ़ाई है ताकि हर क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रख सके और आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सके। पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे वे पूरी ऊर्जा के साथ चुनावी अभियान में जुट सकें और पार्टी की जीत सुनिश्चित कर सकें।

बीजेपी ने शुरू किया चुनावी कैंपेन

हाल ही में बीजेपी ने "मिला क्या" नामक एक चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया है। जो रणनीति स्वतंत्र एजेंसियों के निष्कर्षों पर आधारित है। इसमें मतदाताओं के मुद्दों को सीधे संबोधित करने की कोशिश की गई है। पार्टी की नई प्रचार रणनीति और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया दोनों ही मतदाताओं को प्रभावित करने और चुनाव में सफलता प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

चुनाव से रघुवर की दूरी
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास इस बार चुनावी गतिविधियों से दूर रहेंगे। 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। जिसमें पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया और बाद में ओडिशा का गवर्नर नियुक्त कर दिया था।

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