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11 अभ्यर्थी की मौत से झारखंड में तनाव, विपक्ष ने सरकार पर लगाया 'तुगलकी फरमान' जारी करने का आरोप

झारखंड में चल रही उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में अब तक 11 युवाओं की मौत हो चुकी है। इस वजह से राज्य सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष ने राज्य सरकार पर तुगलकी फरमान जारी करने और युवाओं की जान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार नौकरी देने के बजाय मौत बांट रही है।

यह दुखद घटना छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के कौवल गांव में हुई। मृतक अभ्यर्थी अरुण कुमार के परिजनों से मिलने पहुंचे अमर कुमार बाउरी ने सरकार की निंदा की। अरुण कुमार के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में काफी होशियार था और उसने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता भी प्राप्त की थी। बावजूद इसके, उसे सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई।

Jharkhand Aspirants Death

भर्ती दौड़ के दौरान बेहोश होकर अस्पताल में भर्ती किए गए अरुण की मौत से परिवार सदमे में है। मृतक की बहन ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी जानकारी के अरुण को अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां इलाज की उचित सुविधा नहीं थी। बाद में अरुण को रांची के रिम्स अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन हालत बिगड़ने के कारण उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

Jharkhand Aspirant Death

नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिजनों को केस दर्ज कराने का सुझाव दिया और कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को लेकर जनहित याचिका दाखिल करेगी। उन्होंने राज्य सरकार से सभी मृतक अभ्यर्थियों के परिजनों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की।

दौड़ के दौरान हुई अभ्यर्थियों की मौत

भवनाथपुर विधायक भानु प्रताप शाही ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार युवाओं से डरकर असमय दौड़ जैसी परीक्षाएं ले रही है, जो आमतौर पर सर्दियों के मौसम में आयोजित होती हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 11 युवाओं की मौत हो चुकी है, जिसका जवाब राज्य के युवा अवश्य देंगे।

इस मुलाकात के दौरान छतरपुर विधायक पुष्पा देवी, भवनाथपुर विधायक भानु प्रताप शाही, सांसद पलामू बी. डी. राम, पूर्व सांसद घूरन राम, और अन्य लोग भी मौजूद थे।

वहीं, इस मामले पर आईजी अभियान एवी होमकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि अब तक 11 अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है, और इस पर 'ऑन नेचुरल डेथ' का केस दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सात केंद्रों पर परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, और सभी केंद्रों पर मेडिकल सुविधाओं के साथ एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है।

यह घटना राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन मौतों के लिए क्या कदम उठाती है।
यह भी देखें: झारखंड चुनाव: चम्पाई सोरेन और भाजपा से कैसे मुकाबला करेंगे हेमंत? कोल्हन बेल्ट की 14 सीटों पर कौन मारेगा बाजी?

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