Jhansi: घटनास्थल पर पहुंचकर दोहराया गया असद एनकाउंटर, जानिए आखिर क्यों किया गया सीन रीक्रिएट
माफिया अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर पर कई सवाल उठे, जिसके चलते मुठभेड़ की जांच दो सदस्यीय न्यायिक आयोग के हवाले कर दी गई। आज उस घटना का सीन रिक्रिएशन किया जा रहा है।

विगत दिनों में उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना रहा असद एनकाउंटर का आज पुलिस द्वारा सीन रीकंस्ट्रक्शन किया गया है। उमेश पाल हत्याकांड में 5-5 लाख के इनामी असद और गुलाम को यूपी STF ने 13 अप्रैल को झांसी में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया। लेकिन इस एनकाउंटर पर सवाल उठे और बाद में जांच के आदेश दिए गए। इसी के तहत आज पुलिस ने एनकाउंटर का रिक्रिएशन किया है।

13 अप्रैल को एनकाउंटर, 25 को सीन रिक्रिएशन
दरअसल, असद और गुलाम एनकाउंटर के मामले में दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन हुआ है। इसमें एक अध्यक्ष तो दूसरे सदस्य हैं। दोनों जांच शुरू करने से पहले पुलिस के उस बयान का अध्ययन करेंगे जो असद और गुलाम के एनकाउंटर के बाद मीडिया में दिया गया था। इसके बाद उसी बयान के आधार पर आयोग घटनास्थल का मुआयना करेगा। घटनास्थल पर जाकर पूरी घटना को समझने की कोशिश की जाएगी। जिसके चलते आज घटना स्थल का सीन रिक्रिएशन किया जा रहा है।

क्यों हो रहा है असद एनकाउंटर का सीन रीक्रिएट
कई बार घटना जो दिख रही होती है, वैसी होती नहीं है। जैसे इस मामले में पुलिस ने दावा किया कि उसने असद और गुलाम को जिंदा पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों ने फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। ऐसे में इस एनकाउंटर पर कई सवाल भी खड़े हो गए। जैसे-:
=> पुलिस का कहना है कि दोनों बाइक से थे और फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में दोनों की बाइक गिर गई और गोली लगने से दोनों की मौत हो गई। अब सवाल ये है कि अगर दोनों भाग रहे थे तो बाइक की रफ्तार काफी तेज रही होगी। ऐसे में बाइक गिरी लेकिन एक भी खरोंच तक बाइक में नहीं आई। ऐसा कैसे हुआ?
=> बाइक की चाबी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुठभेड़ स्थल से जो तस्वीरें सामने आईं, उसमें बाइक की चाबी भी गायब थी। असद के एनकाउंटर के बाद स्थानीय पुलिस के पहुंचने से पहले मीडियाकर्मी तस्वीरें लेने मौके पर पहुंच गए थे। तस्वीरों में बाइक की चाबी गायब है। पुलिस का कहना है कि हो सकता है बाइक पुरानी होने के कारण चाबी कहीं गिर गई हो।
=> सवाल एनकाउंटर की जगह पर भी उठ रहा है। जिस जगह एनकाउंटर हुआ वहां तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही पथरीला और ऊबड़-खाबड़ है। पुलिस की मानें तो इसके पहले असद कानपुर, दिल्ली, अजमेर, मुंबई जैसी जगहों पर छिपा था, ऐसे में वह यहां तक कैसे और क्यों आया ये भी सवाल बना हुआ है?
Recommended Video

सीन रिक्रिएट कर सामने आएगी सच्चाई?
ऐसे और भी कई सवाल हैं जिनके जवाबों की तलाश न्यायिक आयोग करेगा। लेकिन ऐसी स्थिति में जरूरी हो जाता है फॉरेंसिक साइंस लैबरेट्री के वैज्ञानिकों द्वारा क्राइम सीन को रिक्रिएट करना और पता लगाना कि वाकई में मामला है क्या? आपको बता दें कि सीन रिक्रिएट कर पुलिस पता लगाती है कि क्या हुआ था, कहां हुआ था, कैसे हुआ था, कब हुआ था, किसने किया और क्यों किया? इस प्रक्रिया में उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अपराध स्थल पर यह तय किया जाता है कि घटना कैसे हुई। इस प्रक्रिया में अपराध स्थल की वैज्ञानिक जांच की जाती है, घटनास्थल के साक्ष्यों की व्याख्या की जाती है, भौतिक साक्ष्य की लैब में जांच की जाती है, केस से जुड़ी सूचनाओं की चरणबद्ध स्टडी की जाती है और तर्कों के आधार पर एक थिओरी तैयार की जाती है।












Click it and Unblock the Notifications