Year Ender 2024: जम्मू और कश्मीर के लिए कैसा रहा यह साल, 2025 के लिए क्या हैं संभावनाएं
Year Ender 2024: इस साल 8 अक्टूबर को एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू और कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस को पहली बार सरकार बनाने का जनादेश मिला। नई विधानसभा में उमर अब्दुल्ला काफी बढ़िया बहुमत के साथ दाखिल हुए, लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने की वजह से उनकी सरकार के पास पहले जितने अधिकार नहीं हैं और उन्हें सीमित अधिकारों के साथ ही सरकार चलाने की चुनौती मिली है।
लेकिन, इस बार के जम्मू कश्मीर चुनाव में निश्चित रूप से सुनहरे लोकतंत्र की झलक देखने को मिली है। इस यूटी के सभी वर्गों ने दिल खोलकर होकर मतदान प्रक्रिया में भाग लिया और आमतौर पर कोई खास आतंकी वारदात की सूचना नहीं मिली। इसमें जम्मू और कश्मीर की जनता के साथ-साथ राजनीतिक दलों, सुरक्षा बलों और यहां तक कि चुनाव आयोग का बहुत बड़ा योगदान है।

Year Ender 2024: नेशनल कांफ्रेंस ने बनाई केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहली सरकार
90 सीटों वाली जम्मू और कश्मीर विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस की अगुवाई वाले गठबंधन को 49 सीटें मिली हैं। इनमें से अकेले 42 तो उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस (NC) को मिली हैं। लोकसभा चुनावों में उमर खुद अपनी सीट भी नहीं बचा पाए थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह दो सीटों से लड़े और दोनों ही जीत गए। लोकसभा चुनाव में तिहाड़ जेल में बंद इंजीनियर राशिद ने उन्हें अप्रत्याशित रूप से हरा दिया था।
Year Ender 2024: जम्मू और कश्मीर में इस बार मतदान का रिकॉर्ड टूटा
दरअसल, विधानसभा चुनाव में जिस तरह से लोकतंत्र की जीत हुई, उसकी नींव दरअसल इस साल हुए लोकसभा चुनावों में ही पड़ चुकी थी। जम्मू और कश्मीर में लोकसभा की 5 सीटें हैं, जहां 2024 के आम चुनाव में 35 साल का रिकॉर्ड टूट गया और 58.46% वोट पड़े।
जो बारामूला कभी आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात था,वहां 59% लोगों ने मतदान किया। बारामूला के सोपोर में 2019 में मात्र 4% वोट पड़े थे,चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के मुताबिक इस बार 44% तक वोटिंग हुई। सोपोर में हुर्रियत के पूर्व सरगना सैयद अली शाह गिलानी का घर है।
विधानसभा चुनावों में भी वही ट्रेंड कायम रहा है और कुल मिलाकर लगभग 63.5% मतदान दर्ज हुआ। तीसरे और आखिरी चरण में तो यह मतदान प्रतिशत बढ़कर 68.72% तक पहुंच गया। किश्तवाड़ में 80% तक मतदान हुआ।
Year Ender 2024: अलगाववादी और जमात के लोग भी बने जम्हूरियत के हिस्सा
कश्मीर के चुनावों की खासियत ये रही कि इस बार अलगाववादी, जमात-ए-इस्लामी सभी से जुड़े लोगों ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए वोट दिया। जमात-ए-इस्लामी पर बैन है, लेकिन इसके समर्थक उम्मीदवारों ने करीब 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी भी उतार दिए। मजेदार बात ये रही ही कि जमात समर्थित ज्यादातर उम्मीदवार शोपियां, कुलगाम, पुलवामा और सोपोर जैसी सीटों पर भी अपनी जमानतें तक नहीं बचा सके। ये वही जमात है,जो पहले मतदान के बहिष्कार के लिए कुख्यात माना जाता था।
जमात इससे पहले 1987 में चुनाव प्रक्रिया में शामिल हुआ था, जिसमें नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन पर बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे और उसी के बाद घाटी में खून की नदियां बहनी शुरू हो गईं और कश्मीरी पंडितों को अपने ही घरों से बेघर कर दिया गया। जमात पर 14 फरवरी,2019 के पुलवामा हमल के बाद पाबंदी लगाई गई थी।
Year Ender 2024: इंजीनियर राशिद के सियासी उतार-चढ़ाव की गवाह बनी कश्मीर
विधानसभा चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी सुर्खियों में था तो लोकसभा चुनावों के बाद शेख अब्दुल राशिद उर्फ राशिद इंजीनियर चर्चा में आ गए थे। वे आतंकी फंडिंग केस में 2019 से जेल में बंद थे, फिर भी बारामूला में उमर अब्दुल्ला को भारी अंतर से हराकर सबको चौंका दिया।
विधानसभा चुनावों में दिल्ली की एक अदालत ने निर्दलीय सांसद और अवामी इत्तेहाद पार्टी के चीफ इंजीनियर राशिद को दिल्ली की एक अदालत ने चुनाव प्रचार के लिए तिहाड़ जेल से जमानत पर छोड़ा, लेकिन उन्हें लोकसभा चुनावों जैसी सफलता नहीं मिली। जिन 36 सीटों पर उन्होंने प्रत्याशी उतारे थे, उनमें से सिर्फ लंगेट सीट पर ही सफलता मिली।
Year Ender 2024: जम्मू डिविजन में आतंकी घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ाई चिंता
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह साल इसलिए थोड़ा परेशान करने वाला रहा है, क्योंकि पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू डिविजन के रियासी, डोडा, किश्तवाड़ और उधमपुर में कई वारदातों को अंजाम दिया है। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार के तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद 9 जून को दहशतगर्दों ने रियासी में सात तीर्थयात्रियों को तब निशाना बनाया, जब वे शिव खोरी तीर्थ स्थल से बस से लौट रहे थे। इसी तरह उधमपुर और किश्तवाड़ में तीन विलेज डिफेंस गार्ड की हत्या कर दी गई और सुरक्षा बलों के 18 लोग भी इन्हीं इलाकों में अलग-अलग आतंकी वारदातों में शहीद हो गए।
Year Ender 2024: जम्मू और कश्मीर के लिए कैसा होगा साल 2025
जम्मू और कश्मीर के ज्यादातर क्षेत्रों में पहले की तुलना में पिछले कुछ वर्षों में आमतौर पर शांति देखी गई है। लेकिन, जिस तरह से अपेक्षाकृत शांत माने जाने वाले क्षेत्रों में पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद ने सिर उठाने की कोशिश की है, उसको लेकर सुरक्षा एजेंसियों को नए साल में भी चौकन्ना रहना होगा।
जम्मू और कश्मीर में जो सरकार सत्ता में बैठी है, उसने आर्टिकल 370 की बहाली जैसे वादे कर रखे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को इसके लिए सतर्क रहना होगा कि फिर से पत्थरबाजों को शह न दिया जाए और हड़तालों और उस हिंसा के दौर की फिर से शुरुआत न हो सके,जो 2019 से पहले कश्मीर की खूबसूरती में बट्टा लगा रहे थे।
सत्ता में आने के बाद अब्दुल्ला सरकार भी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकती, इसलिए उसके सामने भी ये सारी बातें बड़ी चुनौती बनी रह सकती हैं। खासकर इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में लोकतंत्र को फलता-फूलता देखकर पहले से ही काफी बिलबिलाया हुआ है।
केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर के लोगों से पूर्ण राज्य की बहाली का वादा कर रखा है और सुप्रीम कोर्ट का भी यही नजरिया है। लेकिन,यह जल्द से जल्द संभव हो सके, इसके लिए जनता से लेकर वहां की सत्ता में बैठे लोगों के अलावा विपक्ष को भी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों बड़े ही उत्तरदायी तरीके से निभानी होंगी।












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