श्रीनगर मुठभेड़ में आतंकियों के साथ मारे गए दो व्यापारी, पुलिस ने बताया 'आतंकवाद समर्थक'
श्रीनगर, 16 नवंबर: कश्मीर घाटी में भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ सोमवार को बड़ा ऑपरेशन चलाया था। जिसमें दो आतंकियों के साथ दो स्थानीय व्यापारी भी मारे गए। जम्मू-कश्मीर पुलिस दोनो व्यापारियों को आतंकवादी समर्थक बता रही है। हालांकि इस घटना पर सियासत भी शुरू हो गई है, जहां जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मामले में जांच की मांग की है।

मारे गए दोनों व्यापारियों की पहचान डॉ. मुदासिर गुल और अल्ताफ भट के रूप में हुई है। दोनों की श्रीनगर के हैदरपोरा के वाणिज्यिक परिसर में दुकानें थीं, जहां पर सोमवार शाम मुठभेड़ हुई। मुदासिर ने डेंटल से जुड़ी ट्रेनिंग ली थी और वो कंप्यूटर केंद्र चलाता था, जबकि भट कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का मालिक था। साथ ही उसकी हार्टवेयर और सीमेंट की दुकान भी थी।
वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों को मानव ढाल के रूप में उपयोग करना, उन्हें क्रॉस फायरिंग में मारना और फिर आसानी से उन्हें ओजीडब्ल्यू घोषित करना, भारत सरकार के प्रोसीजर का हिस्सा बन चुका है। सच्चाई को सामने लाने के लिए एक विश्वसनीय न्यायिक जांच जरूरी है।
वहीं परिजनों का आरोप है कि सुरक्षाबलों ने ही दोनों व्यापारियों को मार गिराया है, जबकि पुलिस का कहना है कि दोनों आतंकियों या फिर सुरक्षाबलों की फायरिंग में मारे गए। फिलहाल परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव की मांग कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ने इससे इनकार कर दिया है। इसके पीछे की वजह कानून-व्यवस्था की स्थित को बताया जा रहा है। नियम के तहत चारों शवों को श्रीनगर से 100 किलोमीटर दूर उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा इलाके में दफनाया गया।
IGP ने कही ये बात
वहीं कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने कहा कि मुदासिर का कंप्यूटर सेंटर एक अनधिकृत कॉल सेंटर था, जिसमें छह कंप्यूटर थे। घटना के बाद अल्ताफ और मुदासिर के परिजनों से संपर्क किया गया, लेकिन कानून-व्यवस्था को देखते हुए शव को सौंपा नहीं जा सकता है। घटना स्थल से दो पिस्तौल भी बरामद हुई है। साथ ही इस बात के सबूत हैं कि वाणिज्यिक परिसर का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता था।












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