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Timeline: उमर अब्दुल्‍ला बने जम्‍मू-कश्‍मीर के नए सीएम, जानिए उनका सियासी सफर

Omar Abdullah political journey: जम्‍म कश्‍मीर में दस साल बाद हुए विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार का गठन हो चुका है। जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के अध्यक्ष उमर अब्दुल्‍ला ने मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभाल ली है।

जून 2024 में लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले उमर अब्दुल्‍ला ने चार महीने बाद जम्‍मू-कश्‍मीर में विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल कर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्‍यमंत्री के तौर शपथ ली है। उमर अब्दुल्ला का राजनी‍तिक करियर बड़ा ही उतार-चढ़ाव भरा रहा लेकिन उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी।

Omar Abdullah

दूसरी बार संभाली मुख्‍यमंत्री की कुर्सी

54 साल की उग्र में उमर अब्दुल्‍ला ने मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभालते हुए सीएम के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल की शुरूआत की है। इससे पहले 2009-14 तक उमर अब्दुल्‍ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्‍ता संभाल चुके हैं।

अक्‍टूबर 2024 में संभाली जम्‍मू-कश्‍मीर की सत्‍ता
उमर अब्दुल्‍ला के अपने अब्दुल्‍ला परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जिन्‍होंने जम्‍मू-कश्‍मीर की सत्‍ता संभाली है। उमर से पहले उनके दादा शेख अब्दुल्‍ला ओर पिता फारुख अब्दुल्‍ला सत्‍ता संभाल चुके हैं।

जून 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली थी करारी हार

जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के अध्यक्ष का पद संभाला लेकिन ये जिम्‍मेदारी संभालते ही उन्‍हें और उनकी पार्टी नेशनल कान्‍फ्रेंस को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसमें उसकी आधी से ज़्यादा सीटें चली गईं।

निर्दलीय रशीद इंजी‍िनियर से हार गए थे उमर

कश्‍मीर की बारामुला सीट से उमर को निर्दलीय उम्‍मीदवार अब्दुल रशीद शख उर्फ इंजीनियर रशीद से दो लाख से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।इतने बड़े झटके बावजूद, उमर का राजनीतिक करियर लड़खड़ाया नहीं।

2024 विधानसभा चुनाव में दोनों सीटों पर जीता चुनाव

हालांकि लोकसभा चुनाव 2024 में हार मिलने के बाद उमर ने दोहराया कि जब तब वो जम्‍मू-कश्‍मीर को उसक विशेष राज्‍य का दर्जा वापस नहीं दिलवा देते तब वो विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगे लेकिन चुनाव की तारीख का ऐलान होते ही उन्‍होंने एक नहीं कश्‍मीर की दो सीटों से बडगाम और गंदेरबल से विधानसभा चुनावों के लिए भी नामांकन दाखिल किया। 2004 के विधानसभा चुनाव में उन्‍होंने ना केवल दोनों सीटों पर जीत हासिल की बल्कि सत्‍ता पर भी काबिज होते हुए अब मुख्‍यमंत्री बनते हुए नई पारी की शुरूआत करने जा रहे हैं।

वर्ष 2009 उमर अब्दुल्‍ला बने जम्मू-कश्मीर के सबसे युवा मुख्यमंत्री

वर्ष 2009 उमर अब्दुल्‍ला के राजनीतिक करियर में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि वे 38 वर्ष की आयु में जम्मू-कश्मीर के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल राज्य के बुनियादी ढांचे में सुधार, पर्यटन को बढ़ावा देने और भारत-पाक संबंधों को बेहतर बनाने पर केंद्रित था। इन प्राथमिकताओं का उद्देश्य राज्य की कुछ दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करना और विकास की इसकी क्षमता का लाभ उठाना था।

वर्ष 2010 में उमर सरकार में कश्मीर में अशांति

हालांकि, उमर का नेतृत्व विवादों से अछूता नहीं रहा। उनके कार्यकाल में अशांति के दौर भी देखे गए, खास तौर पर 2010 में कश्मीर में अशांति। इस दौरान, उमर को विरोध प्रदर्शनों से निपटने और मानवाधिकारों के हनन के आरोपों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2006 के सेक्स स्कैंडल से लगा राजनीतिक करियर पर ब्रेक

उमर अब्दुल्‍ला का राजनीतिक करियर 2006 के सेक्स स्कैंडल में शामिल होने के आरोपों से भी प्रभावित हुआ, हालांकि इन चुनौतियों ने उन्हें अपने रास्ते से नहीं रोका।

बदलाव के हिमायती उमर अब्दुल्‍ला सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) के मुखर आलोचक रहे हैं, और क्षेत्र और उसके लोगों पर इसके प्रभाव को उजागर करते रहे हैं। ऐसे मुद्दों पर उनका रुख केंद्र सरकार के साथ जम्मू और कश्मीर के संबंधों के कुछ अधिक विवादास्पद रहा।

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