'जम्मू- कश्मीर में 370 लागू करने की वजह सिर्फ पंजाब के लोगों से डर', सांसद फारूक अब्दुल्ला का बड़ा दावा
नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद फारूक अब्दुल्ला (MP Farooq Abdullah) ने जम्मू- कश्मीर (Jammu and Kashmir) में फिर से धारा 370 (Article 370) लागू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में धारा 370 लागू करने की सिर्फ एक ही वजह थी, वो थी जम्मू कश्मीर की पहचान को बचाना।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सोमवार (8 जनवरी) को जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेशनल कॉन्फेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर से जम्मू कश्मीर में धारा 370 लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा वर्ष 1970 में महाराजा हरि सिंह ने तत्कालीन आवश्यकता के आधार पर धारा 370 को समर्थन दिया था। एनएफ सांसद ने कहा कि जम्मू कश्मीर को पंजाब के लोगों से डर था, जिसके वजह से ये कदम उठाया गया।
एनएफ नेता ने दावा किया कि विभाजन के बाद वर्ष 1947 में लोगों को ऐसा लगता था कि यहां कि संस्कृति को खतरा है। ऐसे में पंजाब के लोगों को जम्मू कश्मीर में आने से रोकने के लिए ही राज्य में धारा 370 लागू की गई।

सांसद फारूक ने कहा, "हम अनुच्छेद 370 नहीं लाए। इसे 1947 में महाराजा हरि सिंह के पहल पर लागू किया गया था। यह केवल इस डर के कारण था, कि विभाजन के बाद पंजाब के लोग यहां आकर बस जाएंगे और हमारे राज्य के गरीब लोग कम दरों पर अपनी जमीन बेच देंगे। नौकरियां केवल स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित थीं। यही अनुच्छेद 370 की विशेषता थी।"
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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू के लोगों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 लागू था तो यहां की सभी नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए रिजर्व थी। इसके बावजूद जब ये अनुच्छेद हटाया गया तो जम्मू के लोग बहुत खुश हुए। एनएफ सांसद ने कहा कि अब उन्हें असलियत में अहसास हो रहा है कि उनके साथ क्या हो रहा है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने कहा कि अब स्थिति ये है कि अगर जम्मू में एक भी नौकरी निकलती है तो उस पर भी केरल के लोग की नियुक्ति हो जाती है। फारुक ने सवा किया कि क्या जम्मू- कश्मीर के लोगों में ये योग्यता नहीं है कि वे पुलिस-प्रशासन में ऊंचे पदों पर जा सकें।












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