Poonch terror attack: पुंछ हमले में आतंकियों को स्थानीय निवासियों ने ऐसे की थी मदद, 6 गिरफ्तार

Poonch terror attack: जम्मू कश्मीर के पुंछ में 20 अप्रैल को आतंकियों ने घात लगाकर सेना के जवानों पर हमला किया था। इस आतंकी हमले में राष्ट्रीय राइफल्स के 5 जवान शहीद हो गए।

Poonch terror attack Update news

Poonch terror attack Update news: जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा कि पुंछ हमले में आतंकियों की मदद स्थानीय निवासियों ने की थी। डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के निर्देश पर छह आतंकी गुर्गों, जिनमें से एक का पूरा परिवार शामिल था, ने हमलावरों को लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराए थे। जिसमें हथियार, गोला-बारूद समेत कई चीजें थीं।

20 अप्रैल को पुंछ के तोता गली में सेना के एक ट्रक पर घात लगाकर हमला करने वाले आतंकवादियों के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था के अलावा एक पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा गिराए गए ग्रेनेड और नकदी को भी आतंकियों तक स्थानीय निवासियों ने पहुंचाए थे।

20 अप्रैल 2023 को हुए पुंछ आतंकी हमले में कम से कम पांच सैनिक मारे गए और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। ट्रक इफ्तार पार्टी के लिए भीमबेर गली से सांगियोटे गांव में फल और अन्य खाने-पीने का सामान लेकर जा रहा था।

राजौरी के दरहल का दौरा करने के बाद डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, "हमने 20 अप्रैल को हुए हमले के बाद 221 संदिग्धों को हिरासत में लिया था, जिनमें से 6 को औपचारिक रूप से आतंकियों की मदद करने के लिए गिरफ्तार किया गया है।"

गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में से केवल तीन, निसार अहमद (एक गुर्जर), फरीद अहमद और मुश्ताक अहमद की पहचान का खुलासा किया गया है। ये तीनों मेंढर सब-डिवीजन के हैं।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि आतंकवादियों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से हमले को अंजाम दिया था। स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना ऐसा हमला संभव नहीं था। आतंकवादियों ने ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के इरादे से सेना के ट्रक को निशाना बनाने के लिए 7.62 मिमी स्टील कोर बुलेट और आईईडी का इस्तेमाल किया था।

आतंकी ऑपरेटिव निसार अहमद के बारे में डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, '1990 के दशक से एक ओवरग्राउंड वर्कर होने के नाते, पुलिस ने उसे पहले भी उठाया था। इस बार भी वह शक के घेरे में था। उसे उठाया गया और हमें कुछ पुख्ता सबूत मिले, जिसके आधार पर उससे पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान, उसने स्वीकार किया कि वह और उसके परिवार के सदस्य इसमें पूरी तरह से शामिल थे।'

डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, 'पिछले दो से तीन महीनों से, निसार अहमद और उसका परिवार आतंकवादियों को भोजन, पानी और अन्य सुविधाएं प्रदान करके उनकी मदद कर रहा था। पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए एक खेप भेजी थी और उसे भी निसार ने उठाकर आतंकियों तक पहुंचाया था। खेप में नकदी, हथियार, गोला-बारूद और हथगोले शामिल थे।'

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