Pahalgam Attack: 'इश्क का रंग सफेद', 6 दिन की शादी का पहलगाम में हुआ खौफनाक अंत, सिसक पड़ा था हिंदुस्तान
Pahalgam Attack Anniversary: आज से ठीक एक साल पहले धरती पर जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर के पहलगाम में एक खौफनाक वारदात हुई थी, जिसे सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं, वक्त का पहिया भले ही एक साल आगे बढ़ गया हो लेकिन बैसरन घाटी में 26 बेगुनाहों की मौत का मंजर आज भी मृतकों के परिवार वालों के आंखों में जिंदा है।
धर्म के नाम पर गोली चलाने वालों ने वहशीपन का ऐसा नंगा नाच दिखाया जिसने इंसानियत का कलेजा तार-तार कर दिया। आतंकवादियों ने जिन 26 लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतारा था, उसमें से एक लेफ्टिनेंट जनरल विनय नरवाल भी थे, जिनके शव के पास बैठी उनकी पत्नी हिमांशी की तस्वीर ने पूरे भारत को रूला दिया था।

आपको जानकर हैरत होगी कि ये जोड़ा मात्र 6 दिन पहले ही शादी के बंधन में बंधा था, 16 अप्रैल को विनय और हिमांशी की शादी हुई थी। दोनों तो हनीमून मनाने यूरोप जाना चाहते थे लेकिन वहां का वीजा नहीं लगने के कारण दोनों जम्मू-कश्मीर में घूमने गए थे।
हनीमून दे गया जीवनभर का दर्द
लेकिन क्या मालूम था कि जिंदगी भर का साथ निभाने की कसम खाने वाला ये जोड़ा आतंकवादियों की जुल्म का शिकार हो जाएगा और ये हनीमून ट्रीप हिमांशी की लाइफ का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा। हाथ में मेहंदी, मांग में सिंदूर और पैरों पर महावर लगाए हिमांशी जब मुस्कुराते हुए विनय नरवाल के साथ हाथ में हाथ डाले बैसरन घाटी पहुंची थी तो उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि चंद मिनटों में उसके इश्क का रंग सफेद हो जाएगा।
धर्म के नाम पर खेला गया बैसरन में खौफनाक खेल
विनय के पास आंतकवादी ने आकर कलमा पढ़ने को कहा और जब वो नहीं पढ़ पाया तो सामने वाले ने उस पर गोलियां बरसा दीं। धर्म के नाम पर नफरत के इस घृणित खेल ने एक पत्नी से उसका सुहाग, एक मां से उसके कलेजे का टुकड़ा और एक पिता से उसकी लाठी छीन ली। मात्र 26 साल की उम्र में विनय नरवाल को खोने वाले उनके माता-पिता का घाव आज भी हरा है।

'Operation Sindoor के लिए सरकार को धन्यवाद, बोले विनय के पिता
न्यूज 18 से बात करते हुए विनय नरवाल के पिता राजेश नरवाल ने कहा कि 'कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब विनय की याद नहीं आती है, हमने आज तक उसका बैग नहीं खोला, उसका कमरा ठीक वैसे ही है जैसे वो छोड़कर गया था, हम हर दिन कोशिश करते हैं खुद को संभालने की लेकिन हर दिन नाकाम होते हैं, जो चला गया वो वापस तो नहीं आएगा लेकिन दिल को सुकून है कि हमारी सरकार ने 'Operation Sindoor' के जरिए आतंकवादियों को कड़ा जवाब दिया है और मुझे उम्मीद है कि उसकी पूरी कोशिश रहेगी कि भविष्य में कभी भी दोबारा ऐसी घटना ना घटे।'
'विनय को था अपने काम से प्यार, ईमानदारी से निभाया नौकरी धर्म'
राजेश नरवाल ने बताया कि 'विनय को डायरी लिखने का शौक था, उसने अपनी डायरी में जिंदगी भर की प्लानिंग कर रखी थी। वो पहले वायुसेना में जाना चाहता था लेकिन जब उसका सेलेक्शन नेवी के लिए हुआ तो वो बहुत खुश हुआ और उसने पूरी शिद्दत के साथ अपना धर्म निभाया।'
'कश्मीर और कश्मीर के मुस्लिमों से नफरत ना करें'
जिंदगी भर का गम सहने वाली हिमांशी ने विनय को खोया जरूर लेकिन वो टूटी नहीं बल्कि उन्होंने मीडिया के सामने आकर लोगों से अपील की थी कि 'पहलगाम हमले के लिए आतंकवादी जिम्मेदार हैं लेकिन इसके लिए आप सभी लोग कश्मीर और कश्मीर के मुस्लिमों से नफरत ना करें।' ये बात देखने में जितनी सरल लगती है उतनी असल में है नहीं लेकिन हिमांशी की अपील उनकी हिम्मत, सच्चाई और वीर सैनिक की पत्नी होने की पूरी गवाही देती है।
पीएचडी स्कॉलर हैं हिमांशी नरवाल
आपको बता दें कि 24 वर्षीय हिमांशी नरवाल एक पीएचडी स्कॉलर हैं, वो मूलरूप से हरियाणा की रहने वाली हैं और इन दिनों गुरुग्राम में रहती हैं। उनके पिता सुनील कुमार एक्साइज एंड टेक्सेशन ऑफिसर हैं। हिमांशी नरवाल के Bullet lover और My first love is my mom नाम के दो इंस्टा अकाउंट हैं, जहां वो काफी एक्टिव रहती हैं।












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